विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारी दुनिया वास्तविक परिवर्तन के बीच से गुजर रही है। हम राष्ट्रवादी अमेरिका, उभरते हुए चीन, विभाजित यूरोप, फिर से उभरते हुए रूस, एक सामान्य जापान, एक असुरक्षित आसियान और पहले से ज्यादा परेशान मध्य पूर्व को समाहित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आतंकवाद के खिलाफ हमारे एकांगी अभियान ने इस मुद्दे को जी20 सहित प्रमुख विश्व मंचों का तेजी से ध्यान केंद्रित किया है।
अमेरिका-तालिबान के शांति समझौते को लेकर विदेश मंत्री ने कहा, 'मैं लोगों को याद दिलाऊंगा कि यह 2000-2001 का अफगानिस्तान नहीं है, तब से कई चीजें हुई हैं। अमेरिका और पश्चिम को हमारा संदेश है कि यह वैश्विक हित में है कि पिछले 18 वर्षों की उपलब्धियों को सुरक्षित, संरक्षित रखा जाए और उसे खतरे में न डाला जाए। मेरी समझ से अब वास्तविक बातचीत शुरू होगी और फिर हमें उन धारणाओं को देखना होगा जो हमारे पास थीं, विभिन्न खिलाड़ी कितने सामंजस्यपूर्ण हैं और उनकी मांगें क्या हैं। देखना होगा कि क्या तालिबान लोकतांत्रिक व्यवस्था में शामिल होता है या लोकतांत्रिक व्यवस्था तालिबान में समायोजित होता है।'
जयशंकर ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों ने वैश्विक संवाद में योगदान देने और अंतरराष्ट्रीय परिणामों पर फर्क करने के लिए एक बढ़ती भारतीय क्षमता का प्रदर्शन किया है। हमने ऐसे समय में कनेक्टिविटी डिबेट को आकार दिया है जब दुनिया उलझन में थी।'