केवल ट्विटर ने ही नहीं, फेसबुक के अधिकारियों ने भी अमेरिकी सीनेट की एक महत्त्वपूर्ण कमेटी के सामने पेश होकर अपने बारे में यह सफाई पेश की थी कि उनके मंच का किसी तरह से दुरूपयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि, कंपनियों के बयान से डेमोक्रेट्स और कंजर्वेटिव दोनों ही लोग सहमत नहीं थे।
ट्विटर को लेकर भाजपा के आरोप
भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि ट्विटर की कार्रवाई बेहद अराजकतावादी है। यह समाज के बीच घृणा-द्वेष फैलाने वाली और एकतरफा है। अपने इस अराजक रवैये से ट्विटर लोगों के विचार और अभिव्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह से केवल एक ही विचारधारा के लोगों के ट्वीट के साथ छेड़छाड़ हो रही है, उसे देखते हुए ट्विटर की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और इसके लिए उस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरएसएस के नेता राजीव तुली ने अमर उजाला से कहा कि ट्विटर की हाल ही कि गतिविधियों को देखने के बाद उसके इरादों के प्रति संदेह पैदा हो रहा है। ट्विटर ने इसी दौरान वामपंथी विचारधारा से जुड़े अनेक विभाजनकारी पोस्ट्स पर भी कोई कार्रवाई नहीं की है तो वहीं उसने राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों की पोस्ट्स पर अवांछित टिप्पणी की है। इससे एक तरह से राष्ट्रवादी लोगों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश हुई है और इसे राष्ट्रवादी लोगों को आम लोगों के बीच अविश्वसनीय साबित करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। सरकार को इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
शनिवार 5 जून को सुबह ट्विटर ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के ट्विटर अकाउंट से ब्लू टिक हटा दिया। इस पर विवाद बढ़ा तो कुछ देर बाद ट्विटर ने उपराष्ट्रपति के अकाउंट्स पर ब्लू टिक वापस कर दिया, लेकिन इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, आरएसएस नेता अरुण कुमार, सुरेश सोनी और सुरेश जोशी के ट्विटर अकाउंट्स पर से भी ब्लू टिक हटा दिया गया। इससे विवाद बढ़ गया।
नई सोशल मीडिया पालिसी को लेकर पहले ही सरकार और ट्विटर के बीच ठनी हुई है। केंद्र सरकार सभी कंपनियों को आईटी नियम मानने को बाध्य कर रही है तो ट्विटर ने इसे लोगों की निजता से हनन बताकर इसे मानने से इनकार किया है। वह इसके खिलाफ अदालत में अपील कर चुकी है।
ट्विटर ने इस पर सफाई दी है कि जो एकाउंट्स लंबे समय से निष्क्रिय थे, उन पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। हालांकि, इसके बाद भी ट्विटर ने उपराष्ट्रपति के अकाउंट पर ब्लू टिक दुबारा लगा दिया। लेकिन यह करके ट्विटर ने एक विवाद को शुरू कर दिया है जिसकी गूँज आगे आने वाले चुनाव तक सुनाई पड़ती रहेगी।