बता दें कि आरोपी मुकेश चोपड़ा पिछले कुछ सालों से कनाडा में रह रहा था। कुछ दिन पहले ही वह हांगकांग के रास्ते एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली आया था। उसका एक भाई वसंत कुज इलाके में रहता है और वह उसी के पास ठहरा था। बीते दो नवंबर को दिल्ली कैंट यानी सेना के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने पर सेना के जवानों ने उसे पकड़ लिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से जब चार मोबाइल फोन, पुस्तकें और कुछ दस्तावेज बरामद किए, तो उस पर जासूसी का शक हुआ।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व खुफिया एजेंसियों ने उससे पूछताछ की। बाद में यह केस दर्ज किया गया कि आरोपी ने दिल्ली कैंट एरिया में डिपार्टमेंट ऑफ मानेक शॉ सेंटर की लाइब्रेरी में घुसकर किताबें चोरी की हैं। सीसीटीवी फुटेज में भी इसकी पुष्टि हुई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने उसे दो दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जिसके बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
जेल अधिकारियों के मुताबिक पिछले गुरुवार की सुबह वह जेल की पहली मंजिल से संदिग्ध हालात में गिर गया। उसके सिर में गंभीर चोट आई। जेल का स्टाफ उसे इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में ले गया। हालांकि इस बारे में जेल प्रशासन और आरोपी के परिजनों की तरफ से कही गई कुछ बातों में विरोधाभास देखने को मिला है। परिजनों का कहना था कि मुकेश को निकटवर्ती अस्पताल में न ले कर सीधे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां शाम सात बजे उसने दम तोड़ दिया।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसी के सूत्रों की मानें तो आरोपी मुकेश चोपड़ा चीन के लिए जासूसी कर रहा था। उसके संबंध कथित तौर पर अमेरिकी एजेंसी के साथ भी हो सकते हैं। हालांकि वह कनाडा में रह रहा था, लेकिन उसके पास अमेरिकी नागरिकता भी बताई गई है। दिल्ली छावनी क्षेत्र से उसने जो महत्वपूर्ण किताब चुराई, वह भारत और चीन की सैन्य जानकारी को लेकर थी।
चूंकि आरोपी पहले भारतीय सेना का अधिकारी रह चुका है, इसलिए स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियों ने उससे गहन पूछताछ की थी। उसके पास चीन को लेकर क्या जानकारी थी या उसने कथित तौर पर भारतीय सेना से संबंधित कौन से दस्तावेज चीन को दिए हैं, आदि बातें जांच का विषय बनीं।
अब मजिस्ट्रेट जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि चीन और अमेरिका की किसी एजेंसी ने तो उसे अपना निशाना नहीं बनाया है। यह भी संभावना है कि उसे किन्हीं दो विदेशी एजेंसियों ने टारगेट किया हो या फिर वह स्वदेशी एजेंसी के रडार पर आ गया हो। आरोपी पिछले एक दशक में करीब 14 बार भारत आया था। उसके पास से मिले दस्तावेजों पर चीनी अधिकारियों के नाम और नंबर लिखे हैं। आरोपी के कब्जे से तीस हजार यूएस डॉलर भी मिले हैं।
उसके संबंध भारतीय सेना के कुछ अधिकारियों से भी बताए गए हैं। खैर, जांच के दौरान इन सब बातों पर गौर किया जाएगा। दूसरी तरफ मुकेश के परिवार वालों बताते हैं कि उसके पास कोई गैर-कानूनी वस्तु नहीं मिली है। मानेक शॉ सेंटर का उसके पास कार्ड था, वह उसे रिन्यू करा रहा था। उसके पास मिले तमाम दस्तावेज या किताबें ऑनलाइन उपलब्ध हैं।