डाटा चोरी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए गठित जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण समिति ने सोमवार को श्वेतपत्र जारी किया। डाटा सुरक्षा और प्राइवेसी बिल का मसौदा तैयार करने के लिए बनी समिति ने डाटा सुरक्षा अथॉरिटी बनाने का सुरक्षा दिया है। साथ ही इसने डाटा ऑडिट, डाटा कलेक्टरों के पंजीकरण, बच्चों की निजी सूचना की रक्षा के लिए प्रावधानों को लागू करने, डाटा चोरी के मामलों में जुर्माना और मुआवजे पर भी अपनी राय दी है।
समिति ने 200 पेज का दस्तावेज जारी कर निजी डाटा की परिभाषा और डाटा के दुरुपयोग के लिए प्रस्तावित जुर्माने जैसे विभिन्न मुद्दों पर लोगों की राय मांगी है।
समिति ने दस्तावेज जारी करने से पहले अमेरिका, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ समेत कई देशों के प्राइवेसी और डाटा सुरक्षा संबंधी कानूनों का अध्ययन किया। फीडबैक देने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2017 है। इसके चलते डाटा सुरक्षा बिल के शीतसत्र में संसद में रखे जाने की संभावना नहीं है।
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मसौदा के लिए तीन माह दिए गए थे
सरकार ने श्रीकृष्ण समिति का गठन इस साल 31 जुलाई को किया गया था। यह फैसला सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं में आधार को अनिवार्य बनाए जाने के चलते लिया गया था। सरकार ने बिल का मसौदे पर सुझाव देने के लिए समिति को तीन महीने का वक्त दिया था।
समीक्षा की जानी जरूरी
दस्तावेज में कहा गया है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों को अपनाने के बावजूद कोई भी डाटाबेस सौ फीसदी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में किसी भी प्रस्तावित डाटा सुरक्षा फ्रेमवर्क और मौजूदा आधार फ्रेमवर्क के बीच समीक्षा की जानी जरूरी है। 12 नंबर वाला आधार कार्ड देश के एक अरब से ज्यादा लोगों को उनकी निजी जानकारी और बायोमेट्रिक डाटा हासिल करने के बाद जारी किया गया है। इसका इस्तेमाल सरकार और निजी कंपनियां कर रही हैं।