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राजनीति में अपराधियों की ‘नो एंट्री’ का मसला संविधान पीठ के हवाले

Wed, 23 Mar 2016 04:41 AM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • राज्य सरकारों और निर्वाचन आयोग को आठ हफ्ते में जवाब देने का सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
  • ऐसी क्या प्रक्रिया हो जिससे अपराधी अपने इशारों पर राजनेताओं को न नचा सकें
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विस्तार
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आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनीति में प्रवेश से रोकने का क्या तरीका होना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट के पास आए इस अहम मामले का निपटारा संविधान पीठ करेगी। संविधान पीठ इस बात पर भी गौर करेगी कि ऐसी क्या प्रक्रिया होनी चाहिए जिससे कि अपराधी अपने इशारों पर राजनेताओं को न नचाए।
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न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की खंडपीठ ने मसले की गंभीरता और संविधानिक प्रावधानों से जुड़ा मसला होने के कारण इसे संविधान पीठ के पास भेज दिया है। इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को आठ हफ्ते में अपना-अपना पक्ष या सुझाव रखने के लिए कहा है।

पीठ ने कहा कि चूंकि इस मसले को लेकर सभी राज्यों को नोटिस जारी किया गया है लिहाजा निर्वाचन आयोग को भी नोटिस जारी किया जाना चाहिए। पीठ ने रजिस्ट्री से निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
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एक समान हो जांच प्रक्रिया: अमाइकस क्यूरी

निर्वाचन आयोग को भी आठ हफ्ते में अपना पक्ष या सुझाव रखने के लिए कहा गया है। अमाइकस क्यूरी वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा के सुझावों के बाद खंडपीठ ने इस मसले को संविधान पीठ के पास भेजा है।

संविधान पीठ जिन मुद्दों पर गौर करेगी कि उनमें सबसे अहम है कि किस प्रकार आपराधिक छवि वाले लोगों को राजनीति में आने पर लगाम लग सके। उस प्रक्रिया की परीक्षण करने की जरूरत है जिससे अपराधी अपनी उंगलियों पर राजनेताओं को नचाते हैं या उन्हें प्रभावित करते हैं। साथ ही आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों जिनका राजनीतिक प्रभाव हो, के खिलाफ जांच और मुकदमों के तेजी से निपटारे के लिए क्या प्रक्रिया होनी चाहिए।

अमाइकस क्यूरी सिद्धार्थ लूथरा ने सुझाव दिया है कि इस पर विचार करने की जरूरत है कि जांच की प्रक्रिया एक समान होनी चाहिए। जांच के लिए इन-हाउस मॉनिटिरिंग की व्यवस्था, फोरेंसिक लैब को उन्नत बनाने, साथ ही अभियोजन एक स्वतंत्र निकाय के जरिये होनी चाहिए, जिस पर कार्यपालिका का नियंत्रण न हो, इन मुद्दों पर भी संविधान पीठ गौर करेगी। इसके अलावा अभियोजन की अनुमति के लिए एक समान पारदर्शी प्रक्रिया के निर्धारण पर भी पर पीठ विचार करेगी।
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