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Food Grains Scheme: मुफ्त अनाज योजना सरकारी खजाने और खाद्यान्न भंडार के लिए क्यों बनी रही चिंता?

Sat, 01 Oct 2022 05:20 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Food Grains Scheme: आधिकारिक लक्ष्य के अनुसार, भारत सत्र 2022-23 (अक्तूबर से मार्च) के लिए 5.18 करोड़ टन चावल खरीद की तैयारी कर रहा है। अगर 31 मार्च, 2023 तक तय लक्ष्य की आधी (करीब 2.6 करोड़ टन) भी टन खरीद हो जाती है, तो भी अनाज भंडार का स्तर 31 मार्च तक बफर और जरूरी परिचालन भंडार के स्तर से काफी ऊपर रहेगा...
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Food Grains Scheme - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने मुफ्त खाद्यान्न वितरण योजना यानी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को सातवीं बार विस्तार दे दिया है। लेकिन इसके बाद भी केंद्र सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। पहला, राजकोष पर पड़ने वाला सब्सिडी का बोझ जो एक बार फिर बढ़ गया है। वहीं दूसरी चुनौती कुछ ऐसी है, जिसका पिछले कई वर्षों में शायद ही देश ने कभी सामना किया हो यानी खाद्यान्न के भंडार की स्थिति। पूरे साल के लिए योजना के व्यापक विस्तार के बजाए सिर्फ तीन महीने का विस्तार बताता है कि केंद्रीय पूल में राजकोष पर बढ़ने वाला भार और अनाज भंडारण दोनों सरकार के लिए चिंता का कारण है।

हालांकि, दोनों के बीच व्यापार और बाजार पर नजर रखने वालों द्वारा की गई सामान्य गणना से पता चलता है कि केंद्रीय पूल अनाज भंडारण के लिए न्यूनतम विचार का हो सकता है, लेकिन यह उतना आसान नहीं है जितना नजर आ रहा है। 16 सितंबर 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अनाज भंडारण केंद्रीय पूल में करीब 5.61 करोड़ टन खाद्यान्न था। (इसमें 95.8 लाख टन बिना पिसाई वाले धान शामिल हैं) जबकि एक अक्तूबर तक 3.07 करोड़ टन अनाज परिचालन भंडार और नीतिगत संरक्षण के लिए रहना चाहिए। बफर नियम के तहत हर साल 31 मार्च को भारत के पास भंडार में करीब 2.14 करोड़ टन खाद्यान्न (चावल और गेहूं) रहना चाहिए।

गणना के अनुसार, जुलाई के बाद से किए गए चावल और गेहूं के बीच बदले गए मिश्रण के आधार पर अनाज स्टॉक की मासिक गिरावट दोनों नियमित पीडीएस और पीएमजीकेएवाई के लिए करीब 80 लाख टन (20 लाख टन गेहूं और 60 लाख टन चावल) हो गई। इसका मतलब हुआ कि अक्तूबर से मार्च तक अगले छह माह में भारत को करीब 4.8 करोड़ टन खाद्यान्न की जरूरत होगी। तीन महीनों में यह संख्या और घटकर 2.5 करोड़ टन हो जाएगी।

योजना को अगर एक बार में छह माह के लिए बढ़ा दिया जाता, तो वित्त वर्ष के भंडार स्तर पर सवाल खड़े हो सकते थे, जिन्हें 2.10 करोड़ टन पर बनाए रखना होता है। इसलिए, तीन माह का विस्तार अच्छा निर्णय है। हालांकि इन संख्याओं में नई चावल खरीद को ध्यान में नहीं रखते हैं, जो कुछ दिन बाद यानी एक अक्तूबर से मार्केटिंग सत्र 2022-23 के लिए शुरू होने हो सकती है। आधिकारिक लक्ष्य के अनुसार, भारत सत्र 2022-23 (अक्तूबर से मार्च) के लिए 5.18 करोड़ टन चावल खरीद की तैयारी कर रहा है। अगर 31 मार्च, 2023 तक तय लक्ष्य की आधी (करीब 2.6 करोड़ टन) भी टन खरीद हो जाती है, तो भी अनाज भंडार का स्तर 31 मार्च तक बफर और जरूरी परिचालन भंडार के स्तर से काफी ऊपर रहेगा। इन दोनों (चावल और गेहूं) के बीच आने वाली खरीफ फसल के कारण गेहूं की तुलना में पूर्व की स्थिति काफी बेहतर है। गेहूं के मामले में अगली फसल बाजार में अप्रैल से ही आएगी।

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