लालू ने जेल से लिखे पत्र में कहा कि 'इन मनुवादियों ने बड़ा खेल खेला है। मेरे पीछे सीबीआई लगाई, मेरे परिवार को घसीटा, मुझे अरेस्ट करने के लिए आर्मी तक भेजी। यही नहीं मेरे नादान बच्चों पर मुकदमें कर उन्हें प्रताड़ित कर उनका मनोबल तोड़ने का षड़यंत्र रचा जिसमें देश की सभी एजेंसियों के छापे तक शामिल हैं। लेकिन मैं जबसे आंदोलन में कूदा तभी से मुझे पता था कि एक दिन मैं जेल जाऊंगा।
मैंने हमेशा से जातिवाद और फासीवाद की सबसे बड़ी पैरोकार संस्था आरएसएस के सामने झुकने से लगातार इनकार किया, लेकिन इन मनुवादियों को ये पता होना चाहिए कि करोड़ो बिहारियों के स्नेह की पूंजी जिस लालू के पास है उसे पाताल में भी भेज दो तो वहां से भी तुम्हारे खिलाफ और तुम्हारी दलित-पिछड़ा विरोधी मानसिकता के खिलाफ बिगुल बजाता रहेगा।