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सिद्धू का ‘उड़ता शॉट’, भाजपा हिट विकेट, 2013 में ही 'आप' के कायल हो गए थे सिद्धू

Tue, 19 Jul 2016 05:08 AM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजनीति के मैदान में नवजोत सिंह सिद्धू का ‘उड़ता शॉट’ वैसा ही है जैसे वह क्रिकेट के पिच पर अक्सर बॉल स्टेडियम के बाहर पहुंचा देते थे। सिद्धू ने यह सब ऐसे समय में किया जब मानसून सत्र के लिए खासकर विधेयकों को पास कराने को लेकर भाजपा एक-एक खिलाड़ी जोड़ रही थी और अचानक उसका अपना खिलाड़ी ही हिट विकेट हो गया। खिलाड़ी भी जब आउट होकर पवेलियन पहुंचा, तभी भाजपा जान सकी कि मैच फिक्स था।
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भाजपा पंजाब चुनाव को लेकर सिद्धू को सीएम तो प्रोजेक्ट नहीं कर रही थी लेकिन वहां के लिए होने वाले सभी अहम फैसलों की जानकारी में सिद्धू राजदार थे। एक समय पंजाब भाजपा की कोर कमेटी में सिद्धू की ही चली और अरुण जेटली के दो चहेतों को कोर कमेटी से हटना पड़ा।

भाजपा में सिद्धू की भरपाई भी हो जाएगी लेकिन पंजाब को लेकर जो चुनावी चक्रव्यूह रचा जा रहा था उसके लीक होने का खतरा और नुकसान भाजपा नेताओं को अब हर कदम पर परेशान करेगा। नवजोत सिंह सिद्धू कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे लेकिन इस बार भाजपा के रणनीतिकार भी नहीं भांप सके कि सिद्धू ऐसा कुछ करने जा रहे हैं।
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सिद्धू की लंबे समय से चली आ रही नाराजगी देखते हुए ही उन्हें राज्यसभा भेजा गया था और माना जा रहा था कि अब वे संतुष्ट हैं। सिद्धू जब से भाजपा में हैं स्टार प्रचारकों की सूची में कई नाम बदले लेकिन सिद्धू इकलौते हैं जो हमेशा अपनी जगह बनाए रहे। 
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वर्ष 2013 में ही आप के  कायल हो गए थे सिद्धू

 नई दिल्ली(राकेेश भट्ट) अलग अंदाज को लेकर चर्चित पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से भाजपा के झटका खाने के बाद ही उसके कायल हो गए थे।

पंजाब में भाजपा से अकालियों के गठबंधन का विरोध लोकसभा चुनाव के पहले से ही कर रहे सिद्धू तभी से आप के संपर्क में थे और अब उनके पास मौका भी था और दस्तूर भी। हालांकि आप नेता सिद्धू को पार्टी में शामिल कर मुख्यमंत्री पद पर प्रोजेक्ट करने को लेकर अभी स्पष्ट नहीं बोल रहे हैं।

दरअसल, 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को झटका देकर सत्ता तक पहुंची आम आदमी पार्टी की कुशल रणनीति, भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाने, उसके सबसे अलग चुनावी घोषणा पत्र, वोलैंटियर्स का समर्पण और केजरीवाल की लोकप्रियता को नवजोत सिंह सिद्धू ने काफी नजदीक से देखा। चुनाव में नितिन गडकरी को प्रभारी तो सिद्धू को सह प्रभारी के रूप में दिल्ली में भाजपा की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

राजधानी में करीब पंद्रह लाख सिख व पंजाबी मतदाताओं को रिझाने के लिए सिद्धू को आगे किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 के चुनाव में भी सिद्धू ने भाजपा के लिए दिल्ली में जमकर प्रचार किया। दोनों ही चुनावों में सिद्धू ने दिल्ली में रात दिन सैकड़ों सभाएं व बैठकें की और आम आदमी पार्टी को निशाने पर रखा।

लेकिन इस बीच सिद्धू ने यह भी देखा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हर वर्ग व जाति का वोटर आप के समर्थन में दिखा। सिद्धू ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व अकाली-भाजपा गठबंधन का विरोध किया था। सिद्धू का यह विरोध और आप के प्रति झुकाव लगातार बढ़ता गया। सूत्रों की मानें तो आप के बड़े नेता 2015 से तो लगातार उनसे संपर्क में थे। 

आप को मिलेगा मजबूत चेहरा
आम आदमी पार्टी पंजाब में मजबूत स्थिति में तो है लेेकिन राजनैतिक पंडितों की मानें तो एक मजबूत स्थानीय चेहरे की कमी उनमें लगातार खल रही थी। स्टार पावर माने जाने वाले सिद्धू अच्छे वक्ता भी हैं और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के मामले में उनका नाम नहीं सुनने को मिला है।

भगवंत मान, एचएस फूलका सहित अन्य पंजाबी नेताओं की नाराजगी से बचने के लिए भले ही आप अभी सिद्धू को मुख्यमंत्री पद के रूप में प्रोजेक्ट न करे लेकिन सिद्धू अगर पार्टी में आते हैं तो उसका ग्राफ पहले के मुकाबले बढ़ेगा।
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