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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में बाढ़ से त्राहि त्राहि कर रहे लोग

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वाराणसी के सामने घाट इलाके में घरों में घुसा पानी - फोटो : Dipak Pandey
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यूपी के आसपास के राज्यों में पिछले कई दिनों से जारी भीषण बारिश से राज्य की कई नदियां उफान पर हैं। गंगा और उसकी सहायक नदियों ने उत्तर प्रदेश समेत बिहार में भी तबाही मचा रखी है। कुछ ऐसा ही हाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का भी है, जहां के निचले इलाकों में गंगा और वरुणा ने कोहराम मचा रखा है। आलम यह है कि नीचले इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है जिसकी वजह से लोग छतों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। 
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लेकिन यह मजबूरी यहीं खत्म नहीं हो जाती। पिछले कई दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे बनारस के लोगों के पास अब खाने के राशन और पीने के पानी की कमी भी हो गई है। जो लोग अब तक अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर नहीं गए हैं वो भूख और प्यास से तड़प रहे हैं। कई लोगों की शिकायत है कि अभी तक उनके पास तो क्या उनके आस पास के इलाकों में भी प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची। हालांकि, सरकार और प्रशासन लगातार हर संभव मदद करने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। 

वाराणसी के डीएम किरण आनंद भी कई क्षेत्रों में राहत कार्य और हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्परता से लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने कई विद्यालयों और प्लॉटों का अधिग्रहण कर उसे राहत शिविरों में तब्दील कर दिया है। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को तत्परता से काम करने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, राहत शिविरों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें रहने को जगह तो मिल गई है लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था काफी चिंताजनक है। अब तक वाराणसी के जिन इलाकों में बाढ़ का पानी घुस आया है उनमें से डोमरी, सूजाबाद, नगवां, रमना, सामने घाट, ढेलवरिया, नक्खीघाट, चौकाघाट, कोनिया, भगवानपुर आदि क्षेत्र प्रमुख हैं। 
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फिलहाल राहत शिविरों के लिए जिन स्थानों का अधिग्रहण किया गया है उनमें नवयुग विद्यामंदिर, प्राथमिक पाठशाला (ढेलवरिया), सर्वेश्वर महंत संस्कृत महाविद्यालय (ढेलवरिया), प्राथमिक पाठशाला (कोनिया), मदरसा रसिदूल उलूम (पक्के महाल), नगवां, अस्सी, टिकरी, तारापुर, मलहिया, रमना, गोयनका संस्कृत महाविद्यालय (नगवां), सिटी गर्ल्स हाईस्कूल (छविमहल) के नाम शामिल हैं। 

राजनीतिक पार्टियां और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचा रहे हैं मदद

बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाते बीजेपी कार्यकर्ता - फोटो : Saurabh Srivastava
बाढ़ की विभीषिका झेल रहे वाराणसी के लोगों के लिए प्रशासन के अलावा कई राजनीतिक पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ता भी हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं। नगवां, गंगोत्री नगर, सामने घाट और उसके आस पास के इलाकों में बाढ़ से घिरे लोगों को पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ता राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, उनके पास संसाधनों की कमी होने के कारण वह उतनी तत्परता से मदद नहीं कर पा रहे हैं जितना वो कर सकते हैं। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं को मदद करने और सुझाव के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ का आलम यह है कि सामने घाट के सैकड़ो मकान करीब-करीब एक मंजिल तक पानी डूब गए हैं। ऐसे में उनके बोरिंग में गंदा पानी चले जाने के कारण पानी की भी किल्लत पैदा हो गई है। उनके पास आटा, चावल, दाल तो है लेकिन पीने के लिए पानी ही नहीं है। इस बीच बीजेपी कार्यकर्ता सौरभ श्रीवास्तव से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वह और उनके साथ बीजेपी के अन्य कार्यकर्ता नगवां, महेश नगर व सामने घाट आदि इलाकों में लोगों को परिवार के प्रति व्यक्ति के हिसाब से पांच लीटर पानी और खाने के लिए पूड़ी सब्जी, ब्रेड, बिस्किट और फल आदि उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं। साथ ही लोगों को रियल फ्रूट जूस, मोमबत्तियां, मिल्क पाउडर और अन्य जरूरी सामग्रियां भी मुहैया कराई जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पर्याप्त संसाधनों की कमी की वजह से लोगों की मदद करने में थोड़ी देरी जरूर हो रही है लेकिन वे और उनके साथी हर प्रभावित इलाकों में जाने की कोशिश कर रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि राहत सामग्री बांटने के लिए उन्होंने दो स्टीमर और एक नाव का प्रबंध किया है जिससे की गली-गली जाकर लोगों को राहत सामग्री मुहैया कराई जा सके। सौरभ ने बताया कि उनके पास बीएचयू के कुछ डॉक्टरों का भी फोन आया जिन्होंने मदद की पेशकश की है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अबतक न तो कोई राहत सामग्री ही उन तक पहुंची है और नहीं लाइफबोट या नाव जिससे की वह अपने घरों से बाहर निकलकर पीने के पानी के अलावा अन्य जरूरी सामान इकट्ठा कर सकें। इस बीच पीएनयू क्लब के लोग भी नगवां, सामने घाट व आस पास के इलाकों में बाढ़ पीड़ितों में जरूरी सामानों का वितरण किया। पीड़ितों की मदद के लिए एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच चुकी है जिसने हरि ओम नगर, शिवाजी नगर, छित्तुपुर, भगवानपुर आदि इलाकों में बाढ़ में फंसे करीब 400 लोगों को बाहर निकाला।
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जाएं तो जाएं कहां?

गंगा नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी - फोटो : Dipak Pandey
बाढ़ की मार झेल रहे लोगों का दर्द यहीं खत्म नहीं हो जाता। जो लोग बाढ़ की वजह से अपना मकान छोड़ना चाहते हैं वो चाहकर भी ऐसा नहीं कर पा रहे। इसके पीछे मुख्य कारण हैं चोरी। लोगों का कहना है कि इलाके ऐसे कई मकानों पर चोरों ने धावा बोल दिया जिसमें कोई नहीं रह रहा। उनका कहना है कि रात के समय चोर ऐसे मकानों पर धावा बोलकर कीमती सामान लेकर गायब हो जा रहे हैं। ऐसे में लोग अपना किसी भी कीमत पर अपना मकान छोड़कर नहीं जाना चाहते।

लोगों का कहना है कि 2013 में आए बाढ़ में भी हालात कुछ ऐसे ही थे। रात के समय चोर नावों और अन्य माध्यमों से ऐसे घरों को निशाना बनाते थे जिसमें कोई नहीं रह रहा था। बाढ़ की वजह से जहां जनता त्रस्त है वहीं चोरों की लॉटरी लग गई है। रोज किसी न किसी इलाके से चोरी की खबर सामने आ रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। बाढ़ की वजह से लोगों के लाखों के सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। उन लोगों की हालत और भी ज्यादा खराब है जिनके बहुमंजिला मकान नहीं हैं। ग्राउंड फ्लोर वाले मकानों में कमर तक पानी भर जाने की वजह से सारे महंगे सामान पानी में डूब गए हैं। लोग किसी तरह से छतों पर तिरपाल डालकर अपना गुजारा कर रहे हैं लेकिन इंद्रदेव ने भी बारीश कर लोगों का जीना दुस्वार कर रखा है। नीचे बाढ़ का पानी और ऊपर बारिश के पानी से लोग काफी मुश्किल से अपनी रातें काट रहे हैं। 

इसके अलावा सांप, बिच्छु और अन्य जीव जंतुओं से का भी लोगों के मन में डर समाया हुआ है। लोगों का कहना है कि पानी में चारों तरह सांप तैरते हुए नजर आ रहे हैं और जहां भी सुखा है वहां कई सांपों ने अपना डेरा लगा रखा है। ऐसे में रात को नींद भी नहीं आती। परिवार की सुरक्षा के लिए कई लोग रातभर जाग कर निगरानी कर रहे हैं। बाढ़ की मार से परेशान लोगों को अब खतरनाक बीमारियों का भी डर सताने लगा है। बाढ़ की वजह से चारों तरफ की गंदगी लोगों के घरों और आसपास के इलाकों में आकर जमा हो गई हैं जिससे हैजा व अन्य संक्रमणकारी बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। हालांकि, गंदगी को देखते हुए कई इलाकों में दवा का छिड़काव भी किया गया है लेकिन अभी भी कई ऐसे इलाके हैं जहां के लोगों में बीमारियों का डर समाया हुआ है।


यह खबर अमर उजाला ब्यूरो वाराणसी के इनपुट, बाढ़ प्रभावित लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशानिक अधिकारियों से बातचीत पर आधारित है। 
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