यूपी के आसपास के राज्यों में पिछले कई दिनों से जारी भीषण बारिश से राज्य की कई नदियां उफान पर हैं। गंगा और उसकी सहायक नदियों ने उत्तर प्रदेश समेत बिहार में भी तबाही मचा रखी है। कुछ ऐसा ही हाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र का भी है, जहां के निचले इलाकों में गंगा और वरुणा ने कोहराम मचा रखा है। आलम यह है कि नीचले इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है जिसकी वजह से लोग छतों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं।
लेकिन यह मजबूरी यहीं खत्म नहीं हो जाती। पिछले कई दिनों से बाढ़ का कहर झेल रहे बनारस के लोगों के पास अब खाने के राशन और पीने के पानी की कमी भी हो गई है। जो लोग अब तक अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर नहीं गए हैं वो भूख और प्यास से तड़प रहे हैं। कई लोगों की शिकायत है कि अभी तक उनके पास तो क्या उनके आस पास के इलाकों में भी प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची। हालांकि, सरकार और प्रशासन लगातार हर संभव मदद करने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
वाराणसी के डीएम किरण आनंद भी कई क्षेत्रों में राहत कार्य और हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्परता से लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने कई विद्यालयों और प्लॉटों का अधिग्रहण कर उसे राहत शिविरों में तब्दील कर दिया है। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को तत्परता से काम करने के भी निर्देश दिए हैं। हालांकि, राहत शिविरों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें रहने को जगह तो मिल गई है लेकिन खाने-पीने की व्यवस्था काफी चिंताजनक है। अब तक वाराणसी के जिन इलाकों में बाढ़ का पानी घुस आया है उनमें से डोमरी, सूजाबाद, नगवां, रमना, सामने घाट, ढेलवरिया, नक्खीघाट, चौकाघाट, कोनिया, भगवानपुर आदि क्षेत्र प्रमुख हैं।
फिलहाल राहत शिविरों के लिए जिन स्थानों का अधिग्रहण किया गया है उनमें नवयुग विद्यामंदिर, प्राथमिक पाठशाला (ढेलवरिया), सर्वेश्वर महंत संस्कृत महाविद्यालय (ढेलवरिया), प्राथमिक पाठशाला (कोनिया), मदरसा रसिदूल उलूम (पक्के महाल), नगवां, अस्सी, टिकरी, तारापुर, मलहिया, रमना, गोयनका संस्कृत महाविद्यालय (नगवां), सिटी गर्ल्स हाईस्कूल (छविमहल) के नाम शामिल हैं।