राफेल: आमंत्रण प्रस्ताव से फाइटर जेट के बेड़े में शामिल होने तक
वायुसेना ने 2007 में इन विमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण प्रस्ताव मंगाए। इसमें अमेरिका (एफ-16, एफ-18 सुपर हार्नेट), रूस (मिग-35), फ्रांस (राफेल), ब्रिटेन (ग्रिपेन), यूरोपीय देशों (यूरोफाइटर टाइफून) की छह अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के फाइटरजेटों ने हिस्सा लिया। कड़ी स्पर्धा में राफेल एल-1 रहा और 2012 में फ्रांस के साथ 126 युद्धक विमान लेने का सौदा फाइनल मोड में आया। सौदे की शर्तों के तहत 18 विमान तैयार हालत में और 108 विमान तकनीकी हस्तांतरण के जरिए भारत में निर्मित करने की रूपरेखा तैयार हुई। इस सौदे के तहत फ्रांस को पहला विमान 2019 में ही भारत को देना था। लेकिन देश में सरकार बदलने के बाद एक बार फिर सौदे का प्रारूप बदल गया। अंतत: भारत ने फ्रांस से तैयार हालत में दो स्क्वॉड्रन (36) राफेल लड़ाकू विमानों को लेने का सौदा किया। इस तरह से 2020 में पहली खेप के पांच राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट से अंबाला पहुंच सके हैं।
राफेल लड़ाकू विमान की खासियत
राफेल लड़ाकू विमान चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसकी क्षमता भारत के अब तक के अगली पंक्ति के लड़ाकू विमान से कहीं ज्यादा है। राफेल की खासियत है कि यह हवा में 28 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से लेकर करीब 2000 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरकर जरूरत के हिसाब से दुश्मन के ठिकाने तबाह कर सकता है। दुश्मन के रेडार को चकमा देने में सक्षम, युद्धक कलाबाजियों में सक्षम, हवा से हवा, हवा से जमीन पर हमले और प्रतिरक्षी युद्धक कौशल में भी राफेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। घातक मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है और सभी युद्धक विमानों की तरह यह भी चपलता से परमाणु हमला कर सकता है। राफेल के वायुसेना में शामिल होने के बाद बेडे में वैरिएशन बढ़ गया है। इस समय भारतीय वायुसेना के पास पुराने मिग-21(बाइसन), मिग-29, मिराज, जगुआर, सुखोई-30 एमकेआई और अब राफेल लड़ाकू विमानों की श्रृंखला है।
दुनिया के युद्धक विमानों में कहां ठहरता है राफेल
राफेल लड़ाकू विमानों को दुनिया के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के बीच का लड़ाकू विमान माना जाता है। यूरोपीय देशों के यूरोफाइटर टाइफून को भी करीब-करीब इसी स्तर का लड़ाकू विमान माना जाता है। अमेरिका की विमान निर्माता कंपनी बोइंग का सुपर एफ-18 सुपर हार्नेट भी इसी श्रेणी का है। फ्रांस की वायुसेना के पायलट भी राफेल को गुणवत्ता का विश्वसनीय फाइटर जेट मानते हैं।
राफेल से भी खतरनाक जेट हैं दुनिया में
लड़ाकू विमानों की दुनिया में 2012 से अब तक काफी कुछ नया खोजा जा चुका है। एक दशक से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान अब आसमान में उड़ान भरकर कंपकपी फैला रहे हैं। ये लड़ाकू विमान तो रेजार की पकड़ में भी नहीं आते और पलक झपकते ही लो फ्लाइंग अटैक में भी सक्षम हैं। लॉकहीड मार्टिन का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान एफ-22 रॉप्टर भी 2005 से कहर बरपाने के लिए अमेरिका की वायुसेना में तैयार है। इससे भी खतरनाक एफ-35 लाइटिंग-2 है। यह भी लॉकहीड मार्टिन ने ही विकसित किया है और 2015 से अमेरिकी वायुसेना को सेवा दे रहा है।
चीन ने भी अपनी जनमुक्ति सेना(वायुसेना) में चेंग्दू जे-20 फाइटर जेट को 2017 में शामिल कर लिया था। यह भी पांचवीं पीढ़ी का घातक फाइटर जेट माना जाता है। शेनयांग एफसी-35 ने भी अपने परीक्षण के दौर को पूरा कर लिया है। सुखोई के सु-57 की परीक्षण उडानें पूरी होने वाली हैं। सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे से पूरी तरह से पर्दा नहीं उठा है, लेकिन रूस की वायुसेना में इसके जल्द शामिल होने की उम्मीद है। बताते हैं यह दुनिया का खतरनाक फाइटर जेट हो सकता है।