पश्चिम बंगाल सरकार के बांग्ला भाषा को स्कूलों में अनिवार्य बनाये जाने से जुड़ी अधिसूचना आने के बाद से दार्जिलिंग में तनाव जारी है। बीते हफ्ते दार्जिलिंग में स्थित राजभवन में एक कैबिनेट मीटिंग चल रही थी। इसके सामने स्थित गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन का ऑफिस है जहां प्रदर्शन हो रहा था। कैबिनेट मीटिंग के बाद पत्थरबाजी हुई, सरकारी बसें जलाई गईं।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने ही पुलिस पर हमला किया। पुलिस को स्थिति को काबू पर पाने के लिए आंसू गैस के प्रयोग से लेकर सेना को भी तैनात करना पड़ा। इसके बाद गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने बंद का आह्वान किया है। लेकिन इस संघर्ष के केंद्र में ममता बनर्जी और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरुंग के बीच जारी तनाव है।
इस पूरे संघर्ष से जुड़़े सवालों के जवाब...
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का सरकार से तनाव क्यों?
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है जिसमें सारे स्कूलों में बांग्ला भाषा पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस मामले में ममता बनर्जी और विमल गुरुंग के बीच तनाव जारी है। हालांकि, ममता बनर्जी ये स्पष्टीकरण दे चुकी हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ये आदेश अनिवार्य नहीं है बल्कि चुनने की आजादी है। लेकिन गोरखा जनमुक्ति के नेता इसके लिए तैयार नहीं है।
गोरखालैंड के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने काफी समर्थन किया था, अब क्या हुआ?
ये बड़ा पेचीदा मामला है। ममता बनर्जी जब सत्ता में आई थीं तो इसके बाद ही गोरखा लैंड एग्रीमेंट पास हुआ था। इसके बाद भी वह पहाड़ों में जाकर मीटिंग करती रहीं।
उन्होंने ऐसी योजना बनाई है जिसके तहत गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के तहत आनी वाली तमाम जनजातियां जैसे राई, तमाम लेपचा, शेरपा लिए के अलग-अलग विकास बोर्ड बना दिए। इसके बाद राज्य सरकार से आर्थिक मदद सीधे इन बोर्डों को जाने लगी जिससे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का महत्व कम हो गया। इससे विमल गुरुंग और जीटीए को लगा कि इससे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का नियंत्रण खत्म हो जाएगा। गोरखा लीडरशिप को लग रहा था ममता बनर्जी उनके क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही हैं इससे ये संघर्ष पैदा हुआ।