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बड़ी संख्या में हो रही मछलियों की मौत, बदल रहे क्रोमोसोम, शोध से हुआ खुलासा

Sat, 09 Jul 2016 04:31 AM IST
शालिनी बाजपेयी/अमर उजाला, बरेली
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रुहेलखंड इलाके की नदियों में बढ़ते प्रदूषण से मछलियों की प्रजनन क्षमता लगातार घट रही है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि मछलियों के क्रोमोसोम में अचानक बदलाव (म्यूटेशन) हो रहा है। साथ ही प्रदूषण से बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो रही है।
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विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस डिपार्टमेंट की प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण के कारण मछलियों के क्रोमोसोम बदल रहे हैं। क्षेत्र की नदियों रामगंगा, नकटिया, देवरनियां, बहगुल आदि में प्रदूषण बढ़ा है। औद्योगिक कचरा सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे भारी धातुएं पानी में मिल रही हैं। मछलियों की कोशिकाएं जिंक सल्फेट और लेड नाइट्रेट से प्रभावित हो रही हैं। प्रजनन पर घातक असर से मछलियों की आबादी घट रही है। 

मछलियों पर प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव के अध्ययन का दूसरा चरण ‘जीनोटॉक्सिसिटी इन क्रोमोसोमल कॉम्प्लीमेंट्स ऑफ फिश फौना अंडर द स्ट्रेस ऑफ हैवी मेटल’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत किया जाना है। शोध से जुड़े डॉ. कमल किशोर माहेश्वरी के मुताबिक अगले चरण के अध्ययन में इस बात की जांच होगी कि नदियों के प्रदूषित जल से मछलियों के क्रोमोसोम में कैसा बदलाव आ रहा है। शोध में विश्वविद्यालय के प्रो. बृजेश त्रिपाठी ने भी काम किया है।
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डी-पेनिसिलामीन से खत्म होगा प्रदूषण का असर
सहायक शोधकर्ता और विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के डॉ. कमल किशोर माहेश्वरी ने बताया कि ‘डी-पेनिसिलामीन’ लेड और जिंक के हानिकारक प्रभाव को खत्म कर देता है। शोध के अंतर्गत पता लगाया जाएगा कि ‘डी-पेनिसिलामीन’ किस फॉर्म और कितनी मात्रा में दी जाए, जिससे मछलियों में हानिकारक प्रभाव खत्म हो सके। नदी के जल में डी-पेनिसिलामीन का क्या असर होगा, इस पर भी अध्ययन किया जाना है।
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