ओडिशा के मत्स्य मंत्री अरुण साहू का कहना है कि सरकार राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य ने 2019-20 में 2.60 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष कै दौरान यह 8.73 लाख मीट्रिक टन था। हम राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
मंत्री बोले, हीराकुंड समेत चार बड़े जलाशयों में चल रहा पिंजड़ा मछली पालन का काम
शुक्रवार को हीराकुंड बांध के दौरे पर पिंजड़े मछली पालन की समीक्षा के बाद साहू ने कहा कि ओडिशा सरकार हीराकुंड जलाशय में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पिंजरा मछली पालन शुरू किया है। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, ओडिशा की 90 फीसदी आबादी अपने नियमित आहार के लिए मछली पर निर्भर है।
अरुण साहू ने कहा कि ‘हीराकुंड बांध जलाशय में केज कल्चर किया जा रहा है। नई संभावनाओं के अलावा कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई। हीराकुंड जलाशय में पिंजरा पालन कार्यक्रम सही तरीके से चल रहा है। इसके अलावा, पिंजड़े की मछली में दो प्रजातियों-तिलापिया और पंगेसियस का उत्पादन किया जा सकता है, जिनमें निर्यात की संभावना है।
अमेरिका, यूरोप और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में तिलापिया मछली की मांग ज्यादा
अमेरिका, यूरोप और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में तिलापिया की मांग अधिक है। इसलिए राज्य सरकार भी मछलियों के शीघ्र प्रजनन पर जोर दे रही है।’ उन्होंने कहा कि संबलपुर जिले के चिपलीमा स्थित मत्स्य बीज हैचरी केंद्र में अगेती प्रजनन से 30 करोड़ और सामान्य प्रजनन से 20 करोड़ उंगलियों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिंजड़े की मछली पालन के लिए राज्य के कई मध्यम जलाशयों के अलावा हीराकुंड सहित चार बड़े जलाशयों के जल क्षेत्र का एक प्रतिशत हिस्सा देने की पहल के तहत पिछले साल नीतिगत निर्णय लिया गया था।
पहले चरण में हीराकुंड में 0.1 प्रतिशत जल क्षेत्र पट्टे के लिए खोला गया है, लेकिन जलाशय में 15,000 पिंजरे लगाए जा सकते हैं, यदि प्रस्तावित एक प्रतिशत क्षेत्र पट्टे पर दिया जा सकता है। मत्स्य विभाग ने 2013 में हीराकुंड बांध जलाशय में 28 पिंजरों को स्थापित करके केज मछली पालन शुरू किया था। बाद में 2019 में जलाशय में 50 और पिंजरे लगाए गए।