जांच, जांच और सिर्फ जांच पर जोर देने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि देर से ही सही लेकिन राज्य सरकारें अब कोरोना की जांच में तेजी लाई है। अगर महामारी से बाहर आना है तो इस प्रयास को आगे भी जारी रखना होगा।
पहली बार देश में 19 लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की गई जिसके चलते संक्रमण दर में भी गिरावट आई। बृहस्पतिवार को 19,20,107 सैंपल की जांच में 20.13 फीसदी संक्रमित मिले। जबकि उससे पहले बुधवार को 17.68 लाख सैंपल की जांच हुई और उसमें 21.45 फीसदी कोरोना संक्रमित मिले हैं।ठीक इसी तरह मंगलवार को 17.23 लाख सैंपल की जांच की गई थी जिसमें 20.94 फीसदी संक्रमित मिले थे।
कोच्चि स्थित राजगिरी कॉलेज के प्रोफेसर रिजो एम जॉन का कहना है कि पिछले साल कोरोना महामारी की जब शुरुआत हुई थी तभी से ज्यादा जांच के लिए कहा जा रहा है लेकिन सरकारों का इस पर ध्यान बेहद कम रहा है।
इस दौरान लैब की संख्या जरूर बढ़ी है लेकिन हमें वर्तमान स्थिति के अनुसार हर दिन 30 लाख से भी ज्यादा जांच करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहली बार देश में 19 लाख से ज्यादा सैंपल की जांच हुई जिसका असर हमारे सामने आए है।
अब अगली चुनौती यह है कि जांच के इस स्तर को आगे रखना है। यह सरकारों पर निर्भर करता है। फिलहाल संक्रमण दर को कम करने के लिए हमारे पास यही सबसे भरोसेमंद विकल्प है।
वहीं नई दिल्ली के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष का कहना है कि देश के 200 से भी ज्यादा जिले इस समय 10 फीसदी से अधिक संक्रमण दर का सामना कर रहे हैं। अगर इन जिलों में कोरोना की जांच खासतौर पर आरटी-पीसीआर को नहीं बढ़ाया गया तो स्थिति हमारे हाथ से निकल सकती है।
आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक 28.63 करोड़ सैंपल की जांच हुई है जिसमें अब तक छह फीसदी से ज्यादा संक्रमित मिल चुके हैं लेकिन प्रतिदिन सामने आ रही संक्रमण दर अभी कई गुना अधिक बढ़ चुकी है। देश में फिलहाल 2498 लैब में वायरस की जांच हो रही है।
गौर करने वाली बात है कि देश में पहली बार एक दिन में 10 लाख से ज्यादा सैंपल की जांच आरटी-पीसीआर के जरिए हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो आरटी पीसीआर जांच को अभी और भी अधिक बढ़ाने की जरूरत है।