दुश्मनों के छक्के छुडाने वाली मध्यम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को डीआरडीओ ने विकसित किया है। बीते साल 27 मार्च को ओडिशा के बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इसका सफल परीक्षण किया गया था।
सेना के लिए बनाई गई मध्यम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली पहली मिसाइल (MRSAM) रेजिमेंट को सेना की पूर्वी कमान में तैनात किया गया है। पूर्वी कमान के प्रवक्ता (गुवाहाटी) ने इसके बारे में जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि रेजिमेंट को डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एमआरएसएएम वेपन सिस्टम से लैस किया गया है।
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गौरतलब है कि दुश्मनों के छक्के छुडाने वाली मध्यम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल को डीआरडीओ ने विकसित किया है। बीते साल 27 मार्च को ओडिशा के बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से इसका सफल परीक्षण किया गया था। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को कुछ ही मिनट में ध्वस्त कर दिया था।
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रेंज आधा किलोमीटर से 100 किमी तक
सूत्रों का कहना है कि एमआरएसएएम की रेंज आधा किलोमीटर से लेकर 100 किलोमीटर तक हैं। एक बार छोड़े जाने के बाद यह आसमान में सीधे 16 किलोमीटर तक के लक्ष्य को गिरा सकती है। पिछले साल दिसंबर में इसका पहला परीक्षण किया गया था। यह बैलिस्टिक मिसाइलों, लड़ाकू जेट विमानों, विमानों, ड्रोन, निगरानी विमानों और एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमानों को मार गिराने में सक्षम है। एमआरएसएएम सैन्य हथियार प्रणाली में मल्टीफंक्शन राडार, मोबाइल लांचर प्रणाली और अन्य व्हीकल शामिल है।
जब इस मिसाइल का परीक्षण किया गया था तब एहतियात बरतते हुए बालासोर जिला प्रशासन ने आईटीआर के नजदीक स्थित तीन गांवों से 7000 लोगों को अस्थायी तौर पर सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया था।