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Monkeypox: क्या भारत में हो गई 'मंकीपॉक्स' की एंट्री? यूरोप से लौटे कोलकाता के युवक में मिले लक्षण, अस्पताल में भर्ती

Sat, 09 Jul 2022 12:06 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

Monkeypox Virus: यूरोप से कोलकाता आए छात्र में मंकीपॉक्स के लक्षण पाए जाने के बाद सैंपल को पुणे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) को परीक्षण के लिए भेजा गया है।
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मंकीपॉक्स संक्रमण - फोटो : WHO
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विस्तार
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यूरापीय देश से लौटे कोलकाता के एक छात्र में मंकीपॉक्स के लक्षण पाए जाने के बाद से अब आशंका जताई जा रही है कि भारत में भी मंकीपॉक्स की एंट्री हो गई है। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर से इसकी घोषणा नहीं की गई है।

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बताया जा रहा है कि पश्चिम मिदनापुर के रहने वाले युवक के शरीर पर 'दाने' और अन्य लक्षणों के साथ कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सैंपल को पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) में परीक्षण के लिए भेजा गया था। हालांकि, अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। मरीज को आइसोलेशन में रखा गया है। उनके घर के लोगों को भी पश्चिम बंगाल का स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूचना दी जाएगी।

मंकीपॉक्स के लक्षण का पहला मामला
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार देश में यह पहला केस है जब किसी संदिग्ध व्यक्ति में मंकी पॉक्स का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। चेचक की तरह दिखने वाले रैशेज से लिए गए तरल पदार्थ के सैंपल भी भेजे गए हैं।
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घबराने की कोई बात नहीं: स्वास्थ्य विभाग
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक सिद्धार्थ नियोगी ने मीडिया को बताया कि घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि उक्त युवक को मंकीपॉक्स से संक्रमित होने की पुष्टि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से रिपोर्ट मिलने के बाद ही की जा सकती है।

मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या लक्षण हो सकते हैं?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमण का इनक्यूबेशन पीरियड (संक्रमण होने से लक्षणों की शुरुआत तक) आमतौर पर 6 से 13 दिनों का होता है, हालांकि कुछ लोगों में यह 5 से 21 दिनों तक भी हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, तेज सिरदर्द, लिम्फैडेनोपैथी (लिम्फ नोड्स की सूजन), पीठ और मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर कमजोरी का अनुभव हो सकता है। लिम्फ नोड्स की सूजन की समस्या को सबसे आम लक्षण माना जाता है। इसके अलावा रोगी के चेहरे और हाथ-पांव पर बड़े आकार के दाने हो सकते हैं। कुछ गंभीर संक्रमितों में यह दाने आंखों के कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स से मौत के मामले 11 फीसदी तक हो सकते हैं। संक्रमण के छोटे बच्चों में मौत का खतरा अधिक रहता है। 

मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या कारण हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स नामक वायरस के कारण यह संक्रमण होता है। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस समूह से संबंधित है। इस समूह के अन्य सदस्य मनुष्यों में चेचक और काउपॉक्स जैसे संक्रमण का कारण बनते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स के एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के मामले बहुत ही कम हैं। संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स, संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के घावों या संक्रमित के निकट संपर्क में आने के कारण दूसरे लोगों में भी संक्रमण होने की आशंका रहती है।

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