स्वदेश में विकसित युद्धक क्षमता वाले ड्रोन रुस्तम-2 ने बुधवार को पहली सफल उड़ान भरी। इससे मानव रहित विमान (यूएवी) विकसित करने के भारत के कार्यक्रम को बड़ी कामयाबी मिली है।
डीआरडीओ ने तपस 201 (रुस्तम-2) की पहली उड़ान को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।
यह मध्यम ऊंचाई पर उड़ने वाला यूएवी है। यह 24 घंटे तक उड़ान भर सकता है और निगरानी रखने और टोह लेने के अभियानों को सफलता पूर्वक अंजाम दे सकता है। अमेरिका के प्रिडेटर ड्रोन की तरह रुस्तम-2 सेनाओं के जंगी अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है। रुस्तम-2 का वजन दो टन है।
बंगलूरू से 250 किमी दूर चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से ड्रोन ने उड़ान भरी। यूएवी और विमानों के उड़ान परीक्षण के लिए इस टेस्ट रेंज को हाल ही में विकसित किया गया है। ड्रोन को उड़ान परीक्षण में उड़ान भरने, उतरने समेत अन्य मानकों पर परखा गया।
इस ड्रोन को तीनों सेनाओं के लिए खुफिया, टोही और निगरानी रखने के अभियानों को अंजाम देने के लिए विकसित किया गया है। यह अपने साथ कई तरह के पेलोड ले जाने में भी सक्षम है। रुस्तम -2 के अभी कई और परीक्षण होंगे।