भारतीय दल के पहले जत्थे के पहुंचने के साथ अंटार्कटिका के लिए 41वें वैज्ञानिक खोज अभियान की शुरुआत हो गई है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक 23 वैज्ञानिकों और सहायक कर्मचारियों का पहला जत्था पिछले सप्ताह भारतीय अंटार्कटिक स्टेशन मैत्री पहुंचा। चार अन्य जत्थे जनवरी 2022 के मध्य तक वायु सेवा और चार्टर्ड आइस-क्लास पोत एमवी वैसिलिय-गोलोवनिन द्वारा अंटार्कटिका पहुंचेंगे।
1981 में शुरू हुए भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम ने 40 वैज्ञानिक एक्सपीडिशन पूरे कर लिए हैं, और अंटार्कटिका में तीन स्थायी अनुसंधान बेस स्टेशन बनाए हैं जिनका नाम दक्षिण गंगोत्री (1983), मैत्री (1988) और भारती (2012) है। वर्तमान में मैत्री और भारती पूरी तरह से चालू हैं। गोवा में स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (एनसीपीओआर), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है जो पूरे भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम का प्रबंधन करता है।
कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह किया गया है पालन
भारत अंटार्कटिका महाद्वीप को कोविड-19 महामारी से मुक्त और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए भारतीय दल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में एक सख्त चिकित्सा परीक्षण के बाद अंटार्कटिका पहुंच गया है। इसके अलावा इस दल ने पर्वतारोहण और स्कीइंग संस्थान, आईटीबीपी औली, उत्तराखंड में बर्फ के अनुकूलन और अस्तित्व के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में 14 दिनों के क्वारंटीन सहित एक कड़े स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन किया है।