तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पद से हटने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति आभार व्यक्त किया। फिरहाद हकीम ने बताया कि दिसंबर 2018 में पूर्व मेयर शोभन चटर्जी ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद नगर निगम के पार्षदों ने उन्हें मेयर चुना था। हकीम ने कहा कि उन्होंने पिछले वर्षों में अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है।
क्यों दिया पद से इस्तीफा
इस्तीफे की वजह बताते हुए हकीम ने कहा कि वे अब इस बड़ी जिम्मेदारी को उठाने में खुद को सक्षम महसूस नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार, मेयर की कुर्सी केवल बैठने के लिए नहीं है, बल्कि यह जनता के प्रति एक बड़ी जवाबदेही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब वे इस जिम्मेदारी को सही ढंग से नहीं संभाल पा रहे, तो पद पर बने रहना ठीक नहीं है। हकीम ने अपनी नेता ममता बनर्जी को उन्हें यह मौका देने के लिए धन्यवाद दिया।
बता दें कि, फिरहाद हकीम तृणमूल कांग्रेस के भरोसेमंद और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने पहले भी ममता बनर्जी से मेयर पद छोड़ने की अनुमति मांगी थी। उस समय पार्टी नेतृत्व ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए कहा था। लेकिन बुधवार को उन्होंने दोबारा इस्तीफे की इच्छा जताई, जिसके बाद ममता बनर्जी ने इसकी मंजूरी दे दी। बताया जा रहा है कि भाजपा सरकार बनने के बाद प्रशासनिक कामकाज में दिक्कतों के कारण उन्होंने यह फैसला लिया है।
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सत्ता परिवर्तन भी मानी जा रही इस्तीफे की वजह
फिरहाद हकीम लंबे समय से टीएमसी का बड़ा चेहरा रहे हैं। वह अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पार्टी की मजबूत पकड़ माने जाते हैं। 2018 से वह कोलकाता के मेयर पद पर थे और राज्य सरकार में कई अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। कुणाल घोष के मुताबिक, फिरहाद हकीम ने भाजपा सरकार बनने के बाद कामकाज में कठिनाइयों का हवाला देते हुए पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल तेजी से बदला है। कई टीएमसी नेताओं का कहना है कि सरकार बदलने के बाद विपक्षी नेताओं के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। हालांकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है।