सेना के जवानों ने एक बार फिर जांबाजी का परिचय दिया है। खुद आग के शोलों में समा गए लेकिन पूरे हथियार (आयुध) डिपो को तबाह होने से बचा लिया। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यार्ड में आग लगने के बाद सेना के अधिकारी और जवान तुरंत सतर्क हो गए थे।
यह आग शोला न बन जाए इसलिए उस पर काबू पाने के लिए पहले दो अधिकारियों समेत जवानों की पहली टीम ने मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन, आग बुझाने के दौरान ही धमाके शुरू हो गए और यह टीम गोला बारूद के धमाकों में समा गई।
लेफ्टिनेंट कर्नल आरएस पवार और मेजर के मनोज की टीम इसी मुहिम का हिस्सा थी। उनकी कोशिश थी कि आग अन्य बंकर में न फैलने पाए। शायद उन्हें भयानक तबाही का अंदाजा था इसलिए वे अपनी जान जोखिम में डाल कर अंदर दाखिल हुए थे।
सेना के अफसर और जवान आग को बुझाने का हर संभव प्रयास कर रहे थे लेकिन हथियारों के जखीरे में सुलग रहे गोले फटने लगे। अधिकारी ने बताया कि हथियार डिपो में हजारों बंकर बने हैं जिसमें रॉकेट, लांचर, मोर्टार, तोप के गोले, एक-47 और मिसाइल आदि रखे हुए हैं।