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पहले 14284 मकानों की ड्राइंग तैयार कराई, फाइल खोने के नाम पर हड़पे 95 लाख रुपये, अब हुई FIR

Sat, 05 Sep 2020 06:03 PM IST
Rajeev Rai डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भ्रष्टाचार - फोटो : डेमो
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दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) के खिलाफ दर्ज हुए आपराधिक मामले में 95 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता, कंसलटेंट प्रमोद अदलखा का आरोप है कि डीएसआईआईडीसी ने 2007 से 2012 के बीच विभिन्न जगहों पर 14284 मकानों की ड्राइंग तैयार कराई थी। 

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चूंकि कंसलटेंट प्रमोद 32 वर्षों से निगम के साथ काम कर रहे थे, इसलिए उन्हें पहले की भांति यह आश्वासन दिया गया कि वे काम शुरू करें, बाद में पक्का एग्रीमेंट कर लेंगे। काम शुरू हो गया और निर्धारित संख्या में मकान भी बन गए। सीवीसी की तकनीकी टीम ने जांच कर अपनी ओके रिपोर्ट दे दी। बाद में मालूम हुआ कि डीएसआईआईडीसी ने सीवीसी टीम को यह कह कर धोखे में रखा कि एग्रीमेंट होने से पहले फाइल गुम हो गई थी। कंसलटेंट को फीस नहीं दी गई है। आगे भी नहीं देंगे। ये खुलासा भी 2018 में आरटीआई के जरिये हुआ है। अब प्रमोद अदलखा ने मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में डीएसआईआईडीसी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कराया है।

पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित कंसलटेंट का आरोप है कि डीएसआईआईडीसी ने नरेला के 1892, बवाना के 1184, भोरगढ़ के 1272, घोघा के 3680, बापरोला के 5552 और बवाना में ही 704 मकानों की ड्राइंग एवं दूसरे दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा था। 2008 में ही इस परियोजना की 84 ड्राइंग विभाग को सौंप दी गई थी। इसी ड्राइंग के आधार पर भारत सरकार ने जेएनएनयूआरएम के तहत प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी। 
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प्रमोद के मुताबिक, सारा काम पूरा होने के बाद जब पैसे देने की बारी आई तो डीएसआईआईडीसी के अधिकारी मुकर गए। वे तरह तरह के बहाने बनाने लगे। कंसलटेंट के साथ औपचारिक समझौता भी नहीं किया गया। उससे यह कह कर सारा प्रोजेक्ट तैयार करा लिया गया कि कुछ दिन बाद पक्का एग्रीमेंट कर लेंगे। करीब छह साल तक कंसलटेंट के चक्कर कटाते रहे। 

2018 में आर्किटेक्ट प्रमोद ने एक आरटीआई के जरिये पता लगाया कि ये सब किसके इशारे पर हो रहा है। मालूम हुआ कि 2011-12 में सीवीसी की टीम इस प्रोजेक्ट का निरीक्षण करने पहुंची थी। सीवीसी को जो दस्तावेज दिखाए गए, उनमें कंसलटेंट प्रमोद का नाम लिखा था, यह भी स्वीकार किया गया कि उक्त कंसलटेंट ने ही प्रोजेक्ट का सारा खाका तैयार किया है। सीवीसी ने जब इस बाबत एग्रीमेंट की कॉपी मांगी तो अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। कहा, कि दस्तावेजों वाली फाइल गुम हो गई है, इसलिए एग्रीमेंट नहीं हो सका। सीवीसी टीम को बताया गया कि अभी तक कंसलटेंट को कोई पैसा नहीं दिया है, आगे भी नहीं देंगे। खास बात है कि फाइल गुम होने की शिकायत पुलिस को नहीं दी गई। उस वक्त सीवीसी ने शिकायतकर्ता से भी कोई पूछताछ नहीं की।

प्रमोद का कहना है कि उसके साथ विश्वासघात हुआ है। यह किस प्रकार का कानून है कि आप काम भी करा लेते हैं और उस बाबत औपचारिक समझौता भी नहीं करते। रिकार्ड खो देते हैं। उसके बाद सेवाओं का भुगतान करने से इंकार कर देते हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस इस मामले की तह तक पहुंचेगी। उन्होंने पुलिस को केस से जुड़े तमाम दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं।

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