लगातार बढ़ रही महंगाई और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अनुमान से कम रहने के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। यहां उच्च महंगाई का जोखिम भी कम है। उन्होंने कहा कि देश का वित्तीय क्षेत्र वृद्धि को समर्थन देने के लिए अच्छी स्थिति में है। इसलिए विकास दर को लेकर ज्यादा चिंता की बात नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ रही महंगाई का दबाव भी अन्य देशों के मुकाबले कम है।
उधर, सरकार ने भी महंगाई से निपटने के लिए आयात शुल्क में कटौती, खाद एवं रसोई गैस पर सब्सिडी और पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने जैसे कई कदम उठाए हैं। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि लगातार बढ़ रही महंगाई से विकास दर पर असर पड़ेगा। डेलॉय इंडिया के अर्थशास्त्री रुक्मि मजूमदार ने कहा कि वास्तविक और नॉमिनल जीडीपी में अंतर इस बात का संकेत है कि महंगाई अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने की रफ्तार कम रही।
2022-23 में विकास दर
| एजेंसी |
अनुमान |
| विश्व बैंक |
8 फीसदी |
| एडीबी |
8 फीसदी |
| आरबीआई |
7.8 फीसदी |
| क्रिसिल |
7.8 फीसदी |
| मॉर्गन स्टैनली |
7.6 फीसदी |
| फिक्की |
7.4 फीसदी |
| एसएंडपी |
7.3 फीसदी |
| कोटक सिक्योरिटीज |
7.3 फीसदी |
| आईएमएफ |
6.9 फीसदी |
| मूडीज |
5.2 फीसदी |
प्रति व्यक्ति महामारी पूर्व स्तर से अब भी कम
- देश की वार्षिक प्रति व्यक्ति आय 2021-22 में स्थिर कीमतों पर 91,481 रुपये रही, जो महामारी पूर्व स्तर से नीचे है। हालांकि, स्थिर मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय आय (एनएनआई) के आधार पर प्रति व्यक्ति आय 2020-21 के मुकाबले 7.5 फीसदी बढ़ी है।
- दरअसल, महामारी और उसके बाद लगाए गए लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित हुई थीं। इससे स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2019-20 में 94,270 रुपये से घटकर 2020-21 में 85,110 रुपये रह गई।
- मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2021-22 के दौरान 18.3 फीसदी बढ़कर 1.5 लाख रुपये हो गई। 2020-21 में यह 1.27 लाख रुपये और 2019-20 में 1.32 लाख रुपये थी।
बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 8.4 फीसदी इजाफा
देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन अप्रैल, 2022 में सालाना आधार पर 8.4 फीसदी बढ़ा है। कोयला, प्राकृतिक गैस समेत अन्य क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल मार्च में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली जैसे आठ बुनियादी क्षेत्रों का उत्पादन 4.9 फीसदी बढ़ा था।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, निम्न तुलनात्मक आधार की वजह से पिछले साल अप्रैल में इन क्षेत्रों में असाधारण रूप से 62.6 फीसदी की उच्च वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, इस साल अप्रैल में कच्चे तेल के उत्पादन में 0.9 फीसदी की गिरावट रही। पिछले साल अप्रैल में यह 2.1 फीसदी घटा था।