भारत के वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह सबसे खराब स्थिति है, यह सच नहीं है। मंत्रालय के अनुसार आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात, जो 2022/23 में 81% था, अनुकूल परिस्थितियों में इसी अवधि में घटकर 70% से नीचे आ सकता है।
भारत सरकार ने अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक चेतावनी को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने शुक्रवार को कहा कि आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि कि देश का ऋण-जीडीपी अनुपात का 100% तक पहुंच सकता है, जो सरासर गलत व्याख्या है। बता दें, मंत्रालय ने वित्त अधिकारियों के साथ गहन चर्चा के बाद आईएमएफ रिपोर्ट का खंडन किया है।
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प्रतिकूल परिस्थितियों में सकल घरेलू उत्पाद का 100% हो सकता है
भारत के वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह सबसे खराब स्थिति है, यह सच नहीं है। मंत्रालय के अनुसार आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का ऋण-जीडीपी अनुपात, जो 2022/23 में 81% था, अनुकूल परिस्थितियों में इसी अवधि में घटकर 70% से नीचे आ सकता है। इसलिए यह रिपोर्ट सही नहीं है। बता दें कि आईएमएफ ने गत दिनों अपनी समीक्षा में कहा था कि भारत का सामान्य सरकारी ऋण, जिसमें संघीय और राज्य सरकार का ऋण शामिल है, वित्तीय वर्ष 2028 तक प्रतिकूल परिस्थितियों में सकल घरेलू उत्पाद का 100% हो सकता है। बता दें, आईएमएफ किसी देश की वर्तमान और मध्यम अवधि की आर्थिक नीतियों और दृष्टिकोण की समीक्षा करता है।
घोषित लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर केंद्र
मंत्रालय ने बताया कि कर्जे के मामले में कई विकसित देशों की स्थिति भारत से भी अधिक खराब रहने की आशंका है। अमेरिका में 160 प्रतिशत, ब्रिटेन में 140 प्रतिशत और चीन में 200 प्रतिशत की आशंका है। यह तो और भी ज्यादा खराब है। मंत्रालय ने साफ किया कि सामान्य सरकारी ऋण वित्त वर्ष 2020-2021 में लगभग 88 प्रतिशत था, जो 2022-2023 में घटकर 81 प्रतिशत हो गया है। केंद्र अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है। उम्मीद है कि मध्यम से लंबी अवधि में सामान्य सरकारी ऋण में काफी गिरावट आएगी। मंत्रालय का कहना है कि क्रॉस-कंट्री तुलना से साफ होता है कि भारत ने अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन किया है।