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कोविड-19 : टीकाकरण के लिए राज्यों को प्रस्तावित 35 हजार करोड़ खर्च कर सकता है केंद्र

Tue, 11 May 2021 02:32 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • वित्त मंत्रालय ने कहा, बजट में दी गई राशि से टीके खरीद कर राज्यों को अनुदान के रूप में दे सकती है सरकार
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कोरोना टीकाकरण - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि वित्त वर्ष 2022 के केंद्रीय बजट में टीकाकरण के लिए राज्यों को प्रस्तावित 35 हजार करोड़ रुपये का वह भी उपयोग कर सकता है। वह इसके जरिये टीके खरीद कर राज्यों को अनुदान के रूप में दे सकता है।

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मंत्रालय ने कहा, यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि केंद्र सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण पर खर्च के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है। ‘राज्यों को हस्तांतरण’ शीर्षक के साथ अनुदान संख्या 40 के लिए मांग के तहत 35,000 करोड़ रुपये की राशि दर्शाई गई है। वास्तव में इस खाते के माध्यम से केंद्र द्वारा टीके हासिल किए और खरीदे जा रहे हैं।

मंत्रालय ने इसके प्रशासकीय फायदे गिनाते हुए कहा कि ऐसा करने से इन्हें त्रैमासिक खर्च के नियंत्रण से बाहर रखना संभव हो सका है। टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार के पास कोई बजट प्रावधान न होने की एक वेबसाइट की रिपोर्ट को नकारते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा कि वास्तव में टीकों की खरीद हो रही है। इनका पैसा 35000 करोड़ रुपये के तय बजट से चुकाया जा रहा है। यह खर्च स्वास्थ्य मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजनाओं से अलग रखा गया है।
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साथ ही इस पर निगरानी और प्रबंधन भी बेहतर हुआ है। अभी 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं को निशुल्क टीके लगाए जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार ने 17.56 करोड़ टीके राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को मुहैया करवाए हैं।

वहीं सीरम इंस्टीट्यूट से 26.7 करोड़ कोविशील्ड टीके खरीदने के लिए 3639.67 करोड़ रुपये का आर्डर दिया गया है। इसी प्रकार भारत बायोटेक कंपनी के 8 करोड़ कोवाक्सिन टीके के लिए 1104.78 करोड़ रुपये दिया गया है।

वेबसाइट में छपी थी खबर, वित्त मंत्रालय ने दिया स्पष्टीकरण
एक वेबसाइट पर इस शीर्षक से खबर छपी थी कि ‘मोदी सरकार के टीकाकरण वित्त पोषण का सच: राज्यों का खर्च 35,000 करोड़, केंद्र का शून्य’। इसी पर स्पष्टीकरण देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा, जैसा कि खबर में ही बताया गया है कि टीकाकरण के लिए धन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बजट वर्गीकरण वास्तव में कोई मायने नहीं रखता है। राज्यों को हस्तांतरण के शीर्षक वाली मांग के उपयोग का अर्थ यह नहीं है कि केंद्र द्वारा व्यय नहीं किया जा सकता है।

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