नोटबंदी पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के मंगलवार के बयान और इस बारे में सोमवार को रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी अधिसूचना ने एक बार फिर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। वित्त मंत्री कहते हैं कि पहली बार कोई व्यक्ति चाहे जितनी मर्जी पुराने नोट जमा करा सकते हैं और इस दौरान उससे कोई पूछताछ नहीं होगी। लेकिन आरबीआई की चिट्ठी में कहा गया कि अब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों में 5000 रुपये से अधिक रकम जमा करने वालों को बताना होगा कि अभी तक वे ऐसा क्यों नहीं कर पाए।
मंगलवार को बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में जेटली ने कहा कि कोई व्यक्ति एक बार में कितनी भी रकम जमा करा सकता है, उससे बैंक के अधिकारी पूछताछ नहीं करेंगे। वहीं रिजर्व बैंक का कहना था कि 30 दिसंबर तक एक खाते में 5000 रुपये से अधिक के पुराने नोट जमा करने वालों से बैंक अधिकारी पूछताछ करेंगे।
उससे दो बैंक अधिकारी सवाल करेंगे कि अभी तक वह इतनी रकम जमा क्यों नहीं करा पाए थे। यही नहीं, इस पूछताछ का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि बाद की जांच प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया जा सके। मंगलवार को जेटली ने कहा कि नोटबंदी के बाद कुछ क्षेत्रों एवं जनउपयोगी सेवाओं के लिए पुराने नोट स्वीकार किए जाने को लेकर जो छूट दी गई थी, वह पिछले सप्ताह ही समाप्त हो गई है।
जिनके पास भी पुराने नोट थे, माना जा रहा है, उन्होंने उसे बैंकों के पास जमा करा दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि जिसके पास भी पुराने नोट है, उसे एक बार में जमा कराएं। कोई व्यक्ति अगर हर दिन बैंक जाता है और कुछ रकम जमा करता है तो इससे यह संदेह होता है कि आखिर वह कहां से रकम प्राप्त कर रहा है। लिहाजा लोगों को सलाह दी जाती है कि वे एक बार में ही सारी रकम जमा कराएं।
वित्तमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद क्रेडिट और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं ई-वॉलेट के इस्तेमाल में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा, डिजिटल पेमेंट से पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल पेमेंट से भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी। लोगों की सहूलियत के लिए डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क में कमी की गई है।
एक्सिस बैंकों में कथित भ्रष्टाचार मामले पर अरुण जेटली ने कहा कि एक्सिस बैंक मामले में कार्रवाई की जाएगी। जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस बारे में उनकी एक्सिस बैंक के अध्यक्ष से बात हुई है।