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रिजर्व बैंक के सर्कुलर और वित्तमंत्री के बयान में तालमेल नहीं

Wed, 21 Dec 2016 08:31 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली 
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- फोटो : PTI
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नोटबंदी पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के मंगलवार के बयान और इस बारे में सोमवार को रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी अधिसूचना ने एक बार फिर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। वित्त मंत्री कहते हैं कि पहली बार कोई व्यक्ति चाहे जितनी मर्जी पुराने नोट जमा करा सकते हैं और इस दौरान उससे कोई पूछताछ नहीं होगी। लेकिन आरबीआई की चिट्ठी में कहा गया कि अब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों में 5000 रुपये से अधिक रकम जमा करने वालों को बताना होगा कि अभी तक वे ऐसा क्यों नहीं कर पाए। 
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मंगलवार को बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में जेटली ने कहा कि कोई व्यक्ति एक बार में कितनी भी रकम जमा करा सकता है, उससे बैंक के अधिकारी पूछताछ नहीं करेंगे। वहीं रिजर्व बैंक का कहना था कि 30 दिसंबर तक एक खाते में 5000 रुपये से अधिक के पुराने नोट जमा करने वालों से बैंक अधिकारी पूछताछ करेंगे।

उससे दो बैंक अधिकारी सवाल करेंगे कि अभी तक वह इतनी रकम जमा क्यों नहीं करा पाए थे। यही नहीं, इस पूछताछ का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा ताकि बाद की जांच प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल किया जा सके।  मंगलवार को जेटली ने कहा कि नोटबंदी के बाद कुछ क्षेत्रों एवं जनउपयोगी सेवाओं के लिए पुराने नोट स्वीकार किए जाने को लेकर जो छूट दी गई थी, वह पिछले सप्ताह ही समाप्त हो गई है।
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जिनके पास भी पुराने नोट थे, माना जा रहा है, उन्होंने उसे बैंकों के पास जमा करा दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि जिसके पास भी पुराने नोट है, उसे एक बार में जमा कराएं। कोई व्यक्ति अगर हर दिन बैंक जाता है और कुछ रकम जमा करता है तो इससे यह संदेह होता है कि आखिर वह कहां से रकम प्राप्त कर रहा है। लिहाजा लोगों को सलाह दी जाती है कि वे एक बार में ही सारी रकम जमा कराएं।

वित्तमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद क्रेडिट और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं ई-वॉलेट के इस्तेमाल में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा, डिजिटल पेमेंट से पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल पेमेंट से भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी। लोगों की सहूलियत के लिए डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क में कमी की गई है।

एक्सिस बैंकों में कथित भ्रष्टाचार मामले पर अरुण जेटली ने कहा कि एक्सिस बैंक मामले में कार्रवाई की जाएगी। जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस बारे में उनकी एक्सिस बैंक के अध्यक्ष से बात हुई है।

30 दिसंबर के बाद भी पर्याप्त नोट रहेंगे

वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद करेंसी संकट से निपटने के लिए आरबीआई पूरी तरह तैयार है और 30 दिसंबर के बाद भी इसके चेस्ट में पर्याप्त करेंसी उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा, ‘एक भी दिन ऐसा नहीं बीता जब आरबीआई ने बैंकों को करेंसी न पहुंचाई हो। चलन में अब तक कितने नोट आ गए हैं, इस बारे में सही आंकड़ा 30 दिसंबर के बाद ही पता चल पाएगा।’ 

शादी खर्च देने पर कनफ्यूजन 
इससे पहले 21 नवंबर को सरकार ने घोषणा कर दी कि शादी-ब्याह वाले परिवार को 2.5 लाख रुपये नकद दिए जाएंगे। लेकिन शादी के कार्ड और अन्य प्रमाण लेकर पहुंचे ऐसे परिवारों को बैंक ने यह कहकर लौटा दिया कि उनके पास आरबीआई का सर्कुलर नहीं आया है। इस वजह से कुछ लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा तो कुछ लोगों की शादियां भी टूट गईं। 
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2005 से पहले के 500 नोट पर भी भ्रम 

फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि जो ग्राहक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के साथ सन 2005 से पहले वाले 500 के करेंसी नोट जमा कराने आते हैं, उन्हें बैंक लौटा नहीं सकते। नोटबंदी की घोषणा में 2005 से पहले के नोट भी शामिल हैं। इसके बावजूद बैंक 2005 से पहले वाले 500 के नोट लौटाने लगे तो आरबीआई ने कहा कि ये नोट सिर्फ देश के 20 आरबीआई कार्यालयों में ही जमा हो सकते हैं।

आरबीआई की अधिसूचना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
पुराने नोटों में 5000 रुपये से अधिक राशि सशर्त जमा करने संबंधी नई अधिसूचना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि आठ नवंबर को सरकार ने नोटबंदी का फैसला लेते हुए साफ किया था कि 30 दिसंबर तक 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदले जा सकेंगे।

ऐसे में सरकार एक नई अधिसूचना लाकर इसमें शर्त कैसे लगा सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लोगों की असुविधाओं को कम करने के लिए कहा था लेकिन सरकार लोगों की असुविधाएं बढ़ाती जा रही है। 

मोदी के कपड़ों की तरह नियम बदलता है आरबीआई: राहुल 
केंद्रीय बैंक की नई गाइडलाइंस के एक दिन बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि आरबीआई उसी तरह नियम बदल रहा है, जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कपड़े बदलते हैं। कांग्रेस ने 5000 रुपये से अधिक के पुराने नोट 30 दिसंबर तक एक बार ही जमा करने के नियम वापस लेने की मांग की है।

वहीं राहुल ने ट्वीट के जरिये मोदी पर तंज कसा और इसके साथ नोटबंदी के बाद आरबीआई के नियमों पर छपा एक लेख भी पोस्ट किया है। 
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