लोकसभा ने सोमवार को नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट ( एनबीएफआईडी यानी नैबफीड) विधेयक 2021 के गठन को मंजूरी दे दी। यह बैंक देश की अधोसंरचना के निर्माण व विकास की परियोजनाओं का वित्त पोषण करेगा।
मंगलवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एनबीएफआईडी विधेयक-2021 लोकसभा में पेश किया था। चर्चा के उपरांत इसे पारित कर दिया गया। इसके जरिए बुनियादी ढांचे वाली परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए एक सरकारी स्वामित्व वाले डीएफआई की स्थापना हो सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले हफ्ते डीएफआई स्थापित करने को मंजूरी दी थी। बजट में इसका प्रस्ताव भी किया गया था। इससे निवेशकों से धन जुटाने के लिए कर लाभ दिए जाएंगे।
20 हजार करोड़ रुपये के कोष से शुरुआत
नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट की स्थापना 20 हजार करोड़ रुपये के कोष के साथ की जाएगी। सरकार 5,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक अनुदान देगी। सरकार को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में डीएफआई इस फंड को बढ़ाकर तीन लाख करोड़ रुपये तक ले जाएगा।
नैबफीड का स्वामित्व केंद्र के पास
नैबफीड के जरिए देश की दीर्घावधि बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं का वित्त पोषण हो सकेगा। विधेयक पर चर्चा के बाद वित्त मंत्री सीतारमण ने जवाब दिया। इसके बाद सदन ने ध्वनि मत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी। नैबफीड का स्वामित्व पूरी तरह केंद्र सरकार के पास होगा। इस विधेयक के जरिए निजी क्षेत्र के विकास वित्त संस्थान भी बन सकेंगे। इसके लिए रिजर्व बैंक से मंजूरी लेना होगी
10 साल का कर अवकाश रहेगा
नैबफीड में निवेश के लिए 10 साल का कर आयकर अवकाश रहेगा, जबकि रिजर्व बैंक की मंजूरी के बाद बनने वाले ऐसे वित्त संस्थानों को पहले पांच साल कर छूट रहेगी। बाद में इसे पांच साल और बढ़ाया जा सकेगा।