बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर मंगलवार को लोकसभा में चर्चा चल रही थी। इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने भाषा के मुद्दे पर वित्त मंत्री को घेरने की कोशिश की। इस पर वित्त मंत्री भावुक हो गईं और हिंदी को लेकर अपने छात्रा जीवन की याद साझा की।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान एक बहस में भाषा के मुद्दे पर जवाब देते वक्त भावुक हो गईं। लोकसभा में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु में छात्र जीवन में उनको हिंदी सीखने से रोका गया। जब उन्होंने हिंदी सीखने का प्रयास किया तो सड़कों पर उनका मजाक उड़ाया गया।
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दरअसल बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर मंगलवार को लोकसभा में चर्चा चल रही थी। इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने भाषा के मुद्दे पर वित्त मंत्री को घेरने की कोशिश की। इस पर वित्त मंत्री भावुक हो गईं और हिंदी को लेकर अपने छात्रा जीवन की याद साझा की।
उन्होंने कहा कि उस समय दक्षिणी राज्य में हिंदी और संस्कृत सीखने को नीची नजर से देखा जाता था। मैं तमिलनाडु में अपने अनुभव से यह बात कह रही हूं। जब मैं अपने स्कूल के अलावा हिंदी सीखने गई तो सड़कों पर मेरा मजाक उड़ाया गया। मुझसे कहा गया कि ओह तुम हिंदी सीखना चाहते हो। तुम तमिलनाडु में रहते हो और तुम हिंदी सीखना चाहते हो। यह तो उत्तर भारत की भाषा है। ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे हैं।
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निचले सदन में उन्होंने कहा कि हिंदी और संस्कृत सीखना किसी अन्य विदेशी भाषा और शब्दों को सीखने जैसा समझा जाता है। जिनका प्रयोग यहां आने वाले लोग करते हैं। क्या तमिलनाडु भारत का हिस्सा नहीं है? तो मेरे लिए हिंदी सीखने में क्या गलत है। उन्हें 'वंधेरी' (तमिल का शब्द जिसका अर्थ नकारात्मक अर्थ में बाहरी होता है) कहा जाता था। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि वे हमें वंधेरी कहते थे। क्या यह तमिलनाडु की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं है?
वित्त मंत्री ने कहा कि मुझे मेरी पसंद की भाषा सीखने के मौलिक अधिकार से वंचित किया गया। मैंने तमिलनाडु का अनुभव किया है। जहां मुझ पर हिंदी न सीखने का दबाव डाला गया। क्या यह मुझ पर थोपा जाना नहीं है? यह कहना ठीक है कि हम हिंदी नहीं थोपना चाहते। हम हिंदी नहीं थोपना चाहते, लेकिन उन्होंने मुझ पर हिंदी न सीखने का दबाव क्यों डाला? मैं यह पूछना चाहती हूं।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल भाषा को संयुक्त राष्ट्र में ले गए। मुझे एक ऐसा प्रधानमंत्री बताइए जो तमिल को संयुक्त राष्ट्र में ले गया हो वह केवल नरेंद्र मोदी हैं। मुझे एक ऐसा प्रधानमंत्री बताइए जो तमिल को बार-बार बढ़ावा देता हो। क्योंकि वह उस भाषा का सम्मान करते हैं। मुझे एक ऐसा प्रधानमंत्री बताइए जिसके साथ डीएमके गठबंधन में रही हो, जहां प्रधानमंत्री ने तमिल को बढ़ाया हो। हम सभी तमिलों की भावनाओं को मोदी जी ही सम्मान देते हैं।