प्रथम चरण के मतदान के बाद पार्टी अन्य चरणों के चुनाव में भी यही रणनीति अपनाएगी। क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को कम करने के लिए मतदाताओं को तीन बातें समझाई जा रही हैं। पहला- यह मुख्यमंत्री नहीं पीएम पद तय करने का चुनाव है। दूसरा- उम्मीदवार को भूलकर पीएम के नाम पर वोट दें। तीसरा- देश के पास फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा, लोकसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान देश में ‘मोदी फैक्टर’ पूरी तरह हावी रहा और कई राज्यों में मुकाबला भाजपा के पक्ष में रहा। विपक्ष के झूठे प्रचार को जनता ने तवज्जो नहीं दी। वामदलों, तृणमूल और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी पर उन्होंने कहा- नेतृत्व के मुद्दे पर जितना मैंने सोचा था, हालात उससे कहीं ज्यादा निराशाजनक दिख रहे हैं। बसपा नेता मायावती, तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी कांग्रेस अध्यक्ष को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।
विपक्ष में नेतृत्व नहीं
जेटली ने फेसबुक पोस्ट पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष में नेतृत्व करने वाला कोई नहीं है। न तो गठबंधन है, न कोई साझा न्यूनतम कार्यक्रम और न ही कोई असल मुद्दा है।
झूठ फैलाने में जुटे विपक्षी
जेटली ने कहा, एक बेहद लोकप्रिय सरकार और प्रधानमंत्री को सत्ता से बाहर करने के लिए आपके पास वास्तविक मुद्दे होने चाहिए। विपक्ष दो वर्षों में ऐसा करने में नाकाम रहा। राफेल को लेकर विपक्ष के झूठे अभियान में भी कोई दम नहीं दिखा। उद्योगपतियों को ऋण माफी का मुद्दा झूठ था। ईवीएम मशीनों की हेराफेरी उससे भी बड़ा झूठ था। विपक्ष के पास कोई मुद्दा ही नहीं है, कभी वे पुलवामा में आतंकी हमले पर सवाल उठाने लगते हैं, तो कभी बालाकोट में हुई कार्रवाई पर।