वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने में चूक को लेकर चेताया है। उन्होंने कहा कि देश के वृहद आर्थिक परिदृश्य और निवेश पर इसका बुरा असर पड़ेगा। आयोग की यह टिप्पणी मध्यप्रदेश और राजस्थान समेत कुछ राज्यों में किसानों की कर्जमाफी के फैसले के बाद आई है।
सिंह ने कहा कि कुछ राज्य राजकोषीय लक्ष्य के अनुरूप नहीं चल रहे हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थागत तंत्रों के माध्यम से केंद्र और राज्य के संबंधों को मजबूत किया जाना चाहिए। सिंह ने यहां स्कॉच सम्मेलन में एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को श्रम, भूमि और पूंजी जैसे उत्पादन कारकों से जुड़ी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों पर गौर करने की जरूरत है।
प्रति व्यक्ति आय बढ़ी पर चुनौतियां बरकरार
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थागत संरचनाओं के फिर से निरीक्षण की जरूरत है। देबरॉय ने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति आय 2000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है और यह आगे बढ़ेगी भी। इसके बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं। उन्होंने कहा कि 2030-40 तक देश में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि भारत तब भी तुलनात्मक रूप से गरीब देश बना रहेगा।