गुजरात चुनाव के मद्देनजर शुरू हुई मंदिर राजनीति के बीच सोमनाथ चर्चा के केंद्र में हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के धर्म पर सवाल उठने से लेकर राम मंदिर को लेकर शुरू चर्चाओं तक में सोमनाथ मंदिर का जिक्र हो रहा है।
इस बीच अपने-अपने दल की जीत सुनिश्चित करने के लिए भी राजनीतिक दलों के नेताओं और उम्मीदवारों ने बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद मिलने की उम्मीद पाल रखी है। पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी से लेकर कांग्रेस-भाजपा का हर छोटे से बड़ा नेता सोमनाथ आकर बाबा सोमनाथ के दर्शन कर अपने दल की जीत की गुहार लगा चुका है।
अब राज्य की सत्ता के लिए बाबा का आशीर्वाद किसको मिलेगा यह तो 18 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा। मगर यहां सोमनाथ विधानसभा सीट पर बाबा का आशीर्वाद भाजपा उम्मीदवार से रूठता दिख रहा है।
भाजपा ने यहां जस्सा भाई बारड़ को दोबारा से मैदान में उतारा है। वैसे तो उन पर बाबा सोमनाथ की कृपा हमेशा बरसती रही है, लेकिन इस दफे बाबा का आशीर्वाद उनसे रूठ सकता है। कांग्रेस के एमके समीकरण में जस्सा फंसते दिख रहे हैं।
धर्म के भेद पर जाति भारी
सोमनाथ विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने कोहली बिरादरी के विमल भाई चूड़ासमा को मैदान में उतारा है। 35 साल की उम्र के चूड़ासमा के नाम की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। एक तो उन्होंने छोटी सी उम्र में ही अपनी छवि साफ सुथरी और काम करने वाले नेता के रूप में बना ली है। दूसरा कोली समाज से होने की वजह से पूरा कोली समाज उनके नाम की माला जप रहा है।
चारवाड नगर पंचायत अध्यक्ष के रूप में विमल भाई ने सफल कामकाज किए हैं, जिसकी बदौलत बेहद कम उम्र में उनकी छवि एक सकारात्मक नेता की बनी है। जबकि भाजपा उम्मीदवार जस्सा की छवि पर सवाल उठ रहे हैं और विकास कार्य न करने की वजह से उनके खिलाफ जनता की नाराजगी भी नजर आ रही है।
बावजूद उसके यहां का चुनाव धार्मिक भेदभाव से ऊपर जाति पर जाता दिख रहा है। जाति की एकजुटता ने यहां धर्म के भेद को भी पीछे छोड़ दिया है। कभी एक दूसरे के धुर विरोधी दिखने वाले कोली (हिंदू) और मुस्लिम समुदाय के लोग कांग्रेस उम्मीदवार विमल भाई चूड़ासमा के नाम पर एक साथ नजर आ रहे हैं। यही नहीं दोनों ही वर्ग के लोग एक साथ मिलकर रहने की कसमें भी खा रहे हैं। यही वजह है, जिसने यहां भाजपा को परेशानी में डाल दिया है।