मृत डॉक्टर के माता-पिता ने कहा कि उन्होंने इस महीने तीन बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर धमकियों की बता बताई और सुरक्षा की मांग की। पिता ने कहा, 'हमने माननीय राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा है। हमारे राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि किसी भी मदद के लिए हमसे संपर्क करें, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया है।'
आरजी कर दुष्कर्म-हत्याकांड पीड़िता के पिता ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष की ओर से किए गए मानहानि के मुकदमे को उत्पीड़न बताया। उन्होंने घोष के आरोपों को खारिज करते हुए न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया। मृत प्रशिक्षु महिला चिकित्सक के पिता ने बुधवार को बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में अपने घर पर पत्रकारों से कहा, 'यह मामला हमें भ्रमित करने और न्याय के लिए हमारी लड़ाई से ध्यान भटकाने का एक प्रयास है। यह हमें परेशान करने की एक और कोशिश है। यह इससे ज्यादा कुछ नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक मैं जिंदा हूं, यह लड़ाई जारी रहेगी।'
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मनहानि तक बात कैसे पहुंची और अब आगे क्या?
इससे पहले तृणमूल प्रवक्ता घोष ने पीड़िता के पिता पर झूठा आरोप लगाने का आरोप लगाया था। पिता का आरोप यह था कि सीबीआई ने उनकी बेटी की हत्या की जांच को पटरी से उतारने के लिए सत्तारूढ़ दल के नेता से रिश्वत ली। यह शिकायत इस महीने की शुरुआत में 'नवान्न अभियान' विरोध मार्च के दौरान कथित तौर पर की गई टिप्पणियों से उपजी है। पिछले हफ्ते वरिष्ठ नेता ने आरजी कर पीड़िता के पिता को एक कानूनी नोटिस भेजा। घोष ने पहले कहा था कि मैं उन्हें दूसरों के उकसावे में आकर कुछ भी कहने की इजाजत नहीं दे सकता। या तो उन्हें अपनी कही बात के लिए माफी मांगनी चाहिए या फिर अदालत में आकर अपने बयान को साबित करना चाहिए। पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें मानहानि के मुकदमे के बारे में मीडिया से पता चला और वे अदालती दस्तावेज मिलने के बाद जवाब देंगे। उन्होंने कहा, 'हमने अपने वकील से बात कर ली है। जरूरत पड़ी तो हम अदालत का सामना करेंगे।'
मां का छलका दर्द
पीड़िता की मां ने भी घोष पर निशाना साधते हुए उन्हें बेशर्म करार दिया। उन्होंने कहा, 'वे हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं। हमें भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा किसी भी तरह से नहीं हो सकता। अगर उनमें (कुणाल घोष) दिमाग होता, तो वे इंसानियत दिखाते। मुझे नहीं लगता कि उनमें दिमाग है। वह एक अपराधी हैं। उन्हें इंसान नहीं माना जा सकता।'
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सुरक्षा की मांग
इससे पहले मृत डॉक्टर के माता-पिता ने कहा कि उन्होंने इस महीने तीन बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर धमकियों की बता बताई और सुरक्षा की मांग की। पिता ने कहा, 'हमने माननीय राष्ट्रपति को एक पत्र भेजा है। हमारे राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि किसी भी मदद के लिए हमसे संपर्क करें, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया है।' मां ने आगे कहा, 'हमने सब कुछ खो दिया है, हम सिर्फ अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए जिंदा हैं। हो सकता है कि हमें अपनी बेटी वापस न मिले, लेकिन हम यह उजागर करना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं।'
आरजी कर केस और आरोपी को आजीवन कारावास
इससे पहले 31 वर्षीय प्रशिक्षु डॉक्टर का शव 9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में में मिला था। इस साल जनवरी में एक ट्रायल कोर्ट ने एकमात्र दोषी संजय रॉय को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।