केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2018-19 में मुखौटा कंपनियों के खिलाफ अभियान के दूसरे चरण में 2,25,910 कंपनियों का पंजीकरण रद्द करेगी। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, इन कंपनियों ने 2015-16 और 2016-17 का वित्तीय लेखा-जोखा पेश नहीं किया है। सरकार का मानना है कि इससे मुखौटा कंपनियों के जरिये काले धन को सफेद करने पर अंकुश लगेगा।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 2018-19 में अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। इसके तहत सवा दो लाख से ज्यादा मुखौटा कंपनियों पर कंपनी कानून, 2013 की धारा-248 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा 7,191 लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) की पहचान की गई है। इन पर एलएलपी कानून, 2008 की धारा-75 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कंपनियों को मिलेगा सफाई देने का मौका
चिह्नित की गई सभी कंपनियों और एलएलपी को अपनी बात रखने का एक मौका दिया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। रजिस्ट्रार्स ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने 2017-18 के दौरान अभियान के पहले चरण में 2,26,166 कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया था। साथ ही 2013-14, 2014-15 और 2015-16 का सालाना रिटर्न या वित्तीय जानकारी नहीं देने वाले 3.09 लाख निदेशकों को भी अयोग्य घोषित किया था।
केंद्र जल्द शुरू करेगा जागरूकता अभियान
कंपनी मामलों का मंत्रालय जल्द ही जागरूकता अभियान शुरू कर लोगों को निष्क्रिय कंपनी का पंजीकरण कराने का तरीका बताएगा। इसके अलावा सभी एजेसियों के बीच दस्तावेज और जानकारी साझा करने का तंत्र भी बना लिया गया है। दस्तावेज साझा करने की प्रक्रिया की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसके लिए टास्क फोर्स ही न्यायाधिकरण है।
केंद्र ने काले धन के खिलाफ उठाए सख्त कदम
केंद्र सरकार ने काले धन का सफाया करने के लिए चार साल में कई अभियान शुरू किए। इसके तहत काले धन पर विशेष जांच दल का गठन, काला धन (विदेश में अघोषित आय व संपत्ति) व कर आरोपण कानून, 2015, आय घोषणा योजना, 2016, बेनामी लेनदेन निषेध (संशोधन) कानून, 2016 और नोटबंदी जैसे सख्त कदम उठाए गए। फरवरी, 2017 में वित्त सचिव हसमुख अढिया और कॉपोरेट मामलों के सचिव आई. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शेल कंपनियों की पहचान कर कार्रवाई करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया।