आज देश की आतंरिक एवं बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के लिए कई तरह की शक्तियां सक्रिय हैं। पड़ोसी देश हमारे नौजवानों को बहका रहे हैं और बार-बार हमारी आजादी को चैलेंज कर रहे हैं। यही नहीं देश में रह कर कुछ लोग अशांति फैलाने के प्रयास में जुटे हैं वहीं कुछ असामाजिक तत्व देश के बाहर से हमारी अखंडता को कमजोर करने में लगे हैं। केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विदेशी फंडिंग के जरिए देश में घातक शक्तियां अपने पांव पसार रही हैं। ये कहना है केंद्रीय गृह राज्यमंत्री गंगाराम हंसराज अहीर का।
सोमवार को महिपालपुर स्थित नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) मुख्यालय में 'सीसीटीएनएस-गुड प्रेक्टिस एंड सक्सेस स्टोरी' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा, एक बात जान लीजिये कि देश में हिंसा का कहीं कोई स्थान नहीं है।
विदेशी फंडिग से कई राज्यों में है भय का माहौल
विदेशी फंडिंग की मदद से कई राज्यों में भय का माहौल पैदा किया जा रहा है। ऐसे लोग धर्म के नाम पर युवाओं को गुमराह करते हैं। केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में ऐसी ताक़तें सक्रिय हैं। वहां पर देश के भीतर अशांति और अराजकता फैलाने का प्लान तैयार होता है। एनसीआरबी के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, इस एजेंसी का डाटा पूरी तरह विश्वसनीय है।
लोकसभा हो या विदेशी संगठन, किसी ने भी एनसीआरबी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट व डाटा को लेकर कभी कोई सवाल खड़ा नहीं किया। सदन में विपक्ष ने भी इस एजेंसी के डाटा को कभी चैलेंज नहीं किया। यहां छोटी सी दिक्कत यह है कि एनसीआरबी एक साल पहले का डाटा जारी करती है। अगर दो-तीन माह पहले तक का भी डाटा मिल जाए तो ठीक रहेगा।
इससे लोगों को अपडेट जानकारी मिल सकेगी। सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) की मदद से अपराध कम हो रहे हैं। अपराधियों पर भी शिकंजा कस रहा है। इस एजेंसी द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर से 36 राज्यों की पुलिस को मदद मिलेगी। इस एजेंसी में जो लोग अच्छे प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं, उन्हें तव्वजो दी जाएगी। उनके प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द लागू किया जा सके, इसके लिए प्रयास हो रहे हैं।
आज देश के 14749 पुलिस स्टेशन और 6649 बड़े दफ्तर सीसीटीएनएस से जुड़ चुके हैं। बिहार में इस बाबत काम पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वह भी जल्द इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन जाएगा। वेरिफिकेशन प्रक्रिया के आसान होने का श्रेय सीसीटीएनएस को ही जाता है। एनसीआरबी ने अमेरिका के ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम (जीईपी) की तर्ज पर आवेदकों का रिकॉर्ड चैक करने का सिस्टम ईजाद किया है। सीसीटीएनएस के दूसरे फेस में अपराधिक वारदातों को रोकने वाले कई नए उपकरण देखने को मिलेंगे। चेहरे और फिंगर प्रिंट से अपराधियों की पहचान करने वाला अपडेट सॉफ्टवेयर भी जल्द ही पुलिस को मिलेगा।