भले ही देश की आबादी सवा सौ करोड़ हो और इसमें महिलाओं का दबदबा आधा कहा जाता हो (लगभग 49 फीसदी) फिर भी भारत में महिलाओं की स्वास्थ्य से लेकर सुरक्षा तक में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विश्वबैंक की एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
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महिलाओं के कामकाज को लेकर हम दकियानूसी होते जा रहे हैं। 2004-05 में देश में लगभग 43 फीसदी महिलाएं कामकाजी थीं कुछ ऐसा ही आंकड़ा 1993-94 में भी था। लेकिन आज जब 2016-17 में जब देश नए कीर्तिमान रच रहा है कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 27 फीसदी से कम होता जा रहा है। हमारे देश से अच्छी कामकाजी महिलाओं की स्थिति नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की हैं।