पूर्वोत्तर राज्य मेघालय भारत में 'रॉक' संगीत का बड़ा केंद्र है। यहां के 'रॉक बैंड' देश और विदेश में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। इनमें कई बैंड ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ महिलाएं चलाती हैं।
मेघालय एक महिला प्रधान समाज है जहां शादी के बाद पुरुष अपनी पत्नी के घर में रहता है। यहां संपत्ति की वारिस भी बेटियां होती हैं और बेटा भी अपनी मां के नाम से जाना जाता है।
पूर्वोत्तर भारत के इस राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल इस चुनावी समर की तैयारियां कर रहे हैं। मगर महिला प्रधान समाज होने के बावजूद राजनीति में महिलाओं की मौजूदगी न के बराबर ही है। महिलाओं को टिकट देने के मामले में सारे राजनीतिक दल एक समान हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मैदान में सिर्फ दो महिला उम्मीदवारों को उतारा है।
राज्य भाजपा की नेता बियांका किंडीयाह कहती हैं कि महिलाओं के लिए राजनीति में जगह बनाना मुश्किल काम है। वो कहती हैं कि 'टिकट उन्हीं को दिया जाता है जो अपने प्रतिद्वंद्वी को कड़ा मुकाबला दे सकें और चुनाव जीत सकें।'
बियांका कहती हैं, "हां, मेघालय एक महिला प्रधान समाज है। यहाँ महिला ही संपत्ति की वारिस भी है। लेकिन जब आप राजनीति की बात करते हैं तो ये बहुत मुश्किल काम है। महिलाओं के लिए पुरुषों की राजनीतिक दुनिया में अपनी जगह तलाशना बिल्कुल नामुमकिन सा है। जो इक्का-दुक्का महिलाएं राजनीति में हैं भी, वो इसलिए कि उनका परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला है।"
सबसे ज्यादा सात महिलाओं को टिकट कांग्रेस पार्टी ने दिए हैं जबकि क्षेत्रीय दलों का तो और बुरा हाल है।
महिला उम्मीदवार कम क्यों?
आखिर महिलाओं को प्रत्याशी क्यों नहीं बनाना चाहते हैं ये राजनीतिक संगठन ? प्रमुख क्षेत्रीय दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी यूडीपी की वरिष्ठ नेता प्रीटी खारपुंगरो कहती हैं कि महिलाओं के लिए राजनीति में कोई जगह है ही नहीं।
प्रीटी खारपुंगरो का कहना था कि मसला ये नहीं है कि राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट नहीं देते।
वो कहती हैं, "हमारे समाज में पुश्त दर पुश्त यही मान्यता रही है कि महिला घर की मालिक है। उसकी हदें सिर्फ वहीं तक सीमित हैं। चुनाव लड़ना हो या जंग, इसे सिर्फ पुरुषों का काम माना जाता रहा है। महिलाओं को इसमें पीछे ही रखा जाता है। इसलिए राजनीति में महिलाओं का रुझान न के बराबर ही है और कोई उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाना चाहता है।"
मेघालय में 60 में से 36 ऐसी विधानसभा की सीटें हैं जहाँ महिलाओं की जनसंख्या पुरुषों से ज्यादा है। कुल 307 उम्मीदवारों में सिर्फ 33 महिलाएं ही इस बार चुनाव लड़ रही है। इनमे ज्यादातर निर्दलीय ही हैं।
पिछले विधानसभा के चुनावों में तो मात्र 25 महिला उम्मीदवार ही थीं जिनमें से सिर्फ चार ही चुनाव जीत पाई थीं। ये चारों जीती हुई महिला विधायक कांग्रेस पार्टी की हैं।