आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने ढाई सौ करोड़ की ठगी के मामले में एसएमपी इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड (हेलो टैक्सी) की महिला निदेशक को दक्षिणी गोवा से गिरफ्तार किया है।
एप आधारित टैक्सी सर्विस कंपनी में निवेश का झांसा देकर 900 से ज्यादा लोगों से ठगी करने के मामले में महिला आरोपी के खिलाफ दिल्ली ही नहीं, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ला रही है। ईओडब्ल्यू ने कंपनी के खाते में मिले 3.27 करोड़ रुपये और 60 नई कारों को नोएडा में सीज कर दिया है। आरोपी महिला की पहचान उजागर नहीं की गई है।
ईओडब्ल्यू के ज्वाइंट सीपी ओपी मिश्रा के मुताबिक, महिला निदेशक और कंपनी पदाधिकारियों के खिलाफ पीड़ित धर्मेंद्र ने जालसाजी की शिकायत की थी। निदेशक की सहयोगी सरोज महापात्रा, राजेश महतो, सुंदर भाटी और हरीश भाटी ने सैकड़ों लोगों से करोड़ों की ठगी की थी।
इन्होंने लोगों को कंपनी में निवेश के नाम पर प्रति माह 200 गुना मुनाफा देने का झांसा दिया था। रकम हड़पने के बाद लोगों को न तो ब्याज मिला और न मूल राशि।
कंपनी ने दिल्ली के रोहिणी, यूपी के गाजियाबाद स्थित साहिबाबाद में कार्यालय खोला था। जांच में पता चला कि कंपनी अवैध तरीके से चलाई जा रही थी, जिसकी जांच सेबी भी कर रही थी। इस मामले में कंपनी के एक निदेशक राजेश महतो को 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
झांसा देने के लिए पांच सितारा होटल में होती थी बैठक
आरोपी पांच सितारा होटलों में बैठक और सेमिनार करते थे। ऐसा दिखाकर लोगों को कंपनी में निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। केस दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गए थे। इस मामले में महिला निदेशक को भगोड़ा घोषित किया गया था। उसे पुलिस ने शनिवार को दक्षिण गोवा के एक रिसोर्ट गिरफ्तार किया।
आरोपी महिला निदेशक के मोबाइल नंबर को ईओडब्ल्यू टीम लगातार ट्रेेस कर रही थी। एक सप्ताह पहले वह चेन्नई होते हुए सड़क मार्ग से हैदराबाद गई थी, जहां उसने महंगी कार खरीदी। उसी कार से वह गोवा पहुंची। पूछताछ में उसने जालसाजी की रकम से ही कार खरीदने की बात स्वीकार की है।
पुलिस उसके क्रेडिट कार्ड का भी ब्योरा लगातार खंगाल रही थी, क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी कर रही थी। इससे उसकी लोकेशन पता करने में मदद मिली।
ऐसी कंपनी लगाती थी चपत
हेलो टैक्सी मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना चलाती थी। इसमें निवेशकों को बड़ा लाभ देने का दावा किया जाता था। शुरुआत में कंपनी ने 1000 रुपये लगाने वालों को 10 हजार रुपये तक की रकम दी थी। इतनी रकम पाने के बाद हर कोई निवेश करने पहुंच जाता था। इस तरह कंपनी सैकड़ों लोगों से मोटी रकम ऐंठने के बाद फरार हो गई।