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CRPF: सीआरपीएफ में यौन शोषण केस की जांच करने वाली महिला कमांडेंट खुद इन्क्वायरी के घेरे में, लगे हैं ये आरोप

Tue, 30 Sep 2025 08:26 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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CRPF - फोटो : Amar Ujala
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सीआरपीएफ में एक-डेढ़ दशक के दौरान बड़े स्तर पर हुए यौन शोषण के मामलों की जांच करने वाली महिला कमांडेंट नीरजबाला, अब खुद इन्क्वायरी के घेरे में आ गई हैं। सीएमएस के जरिए सीवीसी पोर्टल पर दी गई शिकायत में उन पर कई तरह के आरोप लगे हैं। अब उन आरोपों की जांच की जा रही है। कमांडेंट नीरजबाला, फिलहाल आईजी नॉदर्न सेक्टर नई दिल्ली के मुख्यालय में तैनात हैं। इस प्रकरण को लेकर सीआरपीएफ में अलग-अलग चर्चा चल रही है। कुछ लोगों का कहना है कि उक्त अधिकारी के विरुद्ध लगातार ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं। जिससे न केवल व्यक्तिगत आचरण, बल्कि वित्तीय पारदर्शिता और संगठनात्मक शुचिता पर भी गहरी चिंता उत्पन्न होती है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद भी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि कई बड़े अधिकारी खुद को यौन उत्पीड़न के झूठे आरोपों में नहीं फंसाना चाहते। 

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दूसरी तरफ, ऐसा कहा जा रहा है कि नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन कमांडेंट रहते हुए जिस तरह से उक्त अधिकारी ने फोर्स की 19 महिला जवानों के यौन शोषण मामले की जांच की थी। उस मामले में तत्कालीन डीआईजी खजान सिंह पर गंभीर आरोप लगे थे। गत वर्ष खजान सिंह को डिसमिस कर दिया गया था। बता दें कि 11 अगस्त 2025 को सीआरपीएफ के जेएंडके जोन के स्पेशल डीजी कार्यालय की तरफ से नॉदर्न सेक्टर के आईजी को एक पत्र भेजा गया था। इसमें कहा गया कि प्रियांशु पांडे, (चेयरमैन) पोलिटिका एंड कन्सोलियम रिसर्च इंस्टीट्यूट प्राइवेट लि. ने 6 जुलाई को नीरज बाला कमांडेंट 88 बटालियन, (अब नॉदर्न सेक्टर में तैनात) के खिलाफ सीएमएस के जरिए सीवीसी पोर्टल पर शिकायत दी है।

शिकायत में सरकारी धन का दुरुपयोग, गलत तरीके से एचआरए लेना, खरीद प्रक्रिया में अनियमित्तता, सरकारी संधाधनों का गलत इस्तेमाल, ड्यूटी के कार्यपालन में कोताही और क्वार्टर मास्टर/मोटर ट्रांसपोर्ट अफसर की ड्यूटी एसी को देना, आदि बातें लिखी गई हैं। सीवीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक इस मामले की जांच हो। स्पेशल डीजी कार्यालय ने विशिष्ट कमेंट्स और सिफारिश के साथ बीस दिन के अंदर इस मामले की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा था। 
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इससे बाद 10 सितंबर को कमांडेंट 89 बटालियन ने आईजी नॉदर्न सेक्टर से आग्रह किया है कि नीरजबाला आपके कार्यालय में तैनात हैं। इस मामले में नीरजबाला का उत्तर अभी तक नहीं मिला है। सीआरपीएफ के कमांडेंट 89 बटालियन अंब्रेश कुमार इस मामले की जांच कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जब एक डिप्टी कमांडेंट जम्मू-कश्मीर में सरकारी ड्यूटी पर थे, तब उनके क्वार्टर से घरेलू सामान जबरन बाहर फेंक दिया गया। यह केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि बल की गरिमा पर भी आघात था। एक डीआईजी स्तर के अधिकारी ने इस घटना की जांच के लिए 88 बटालियन का दौरा किया तो पहले उन्हें कैंप में प्रवेश करने से रोका गया। 

बाद में जब जांच प्रारंभ हुई तो डीआईजी पर ही यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगवा दिया गया। महिला अधिकारी ने उस मामले की जांच स्वयं ही प्रारंभ कर दी। इसी तरह से लगभग दो वर्षों तक बटालियन के कमांडेंट के आरक्षित सरकारी क्वार्टर को आवंटित दिखाकर गलत तरीके से हाउस रेंट अलाउंस लेना, ऐसे कथित आरोप भी लगे हैं। अब ताजा मामले की जांच, कमांडेंट स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि कमांडेंट जांच अधिकारी ने उक्त महिला अधिकारी का पक्ष जानने की कई बार कोशिश की, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुई। 

शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर 
2021 में सीआरपीएफ की एक महिला सिपाही ने डीआईजी खजान सिंह पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार और कई वर्षों तक उसे व अन्य महिला जवानों को धमकी देने का आरोप लगाया था। आरोपों में यह बात भी कही गई थी कि सिंह ने अपने अपराधों को अंजाम देने के लिए अपने पद, शक्ति और अर्धसैनिक बल में अन्य प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों के समर्थन का इस्तेमाल किया था। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में भी कई गंभीर आरोप लगे थे। खजान सिंह और उनके सहयोगी सुरजीत सिंह, दोनों सीआरपीएफ के भीतर एक स्कैंडल चलाते थे। इनके कई दूसरे साथी भी रहे थे। आरोप था कि करीब एक दशक पहले भी उनके खिलाफ शिकायत दी गई थी, लेकिन आरोपी ने उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था। 

जांच को कमजोर करने का बहाना 
तत्कालीन नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन कमांडेंट नीरजबाला, जो बल की 19 महिला जवानों के यौन शोषण मामले की जांच कर रही थी, उनका तबादला द्वारका स्थित 88 महिला बटालियन से कभी नोएडा तो कभी बंगलुरु कर दिया जाता। 2022 के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय में लगी याचिका के मुताबिक, उनके ट्रांसफर को यौन शोषण केस की जांच को कमजोर करने का बहाना बताया गया था। दस्तावेजों में कहा गया था कि विभाग तो आरोपी डीआईजी खजान सिंह को आईजी बनाने के लिए बेताब था। ये केस नहीं होता तो उसी वर्ष उन्हें आईजी बना दिया जाता। जांच अधिकारी का तबादला, बंगलुरु में इसलिए किया गया है ताकि पीड़ित लड़कियों पर दबाव बनाकर उन्हें केस वापस लेने के लिए राजी कर लिया जाए। पिटीशन में लिखा गया था कि बल में व्याप्त स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। जनवरी 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट में सील बंद लिफाफे में पेश किया गया अतिरिक्त शपथ पत्र, यौन शोषण के तरीके से लेकर आरोपियों की सारी कहानी बयां कर रहा था। 

जांच अधिकारी का तबादला रद्द करने की बात कही 
नीरजबाजा की याचिका में 'अर्जेंट हियरिंग' की गुजारिश की गई थी। साथ ही सीआरपीएफ द्वारा जारी वह ट्रांसफर ऑर्डर, जिसमें उसे द्वारका 88 बटालियन से बंगलुरु जाने के लिए कहा गया, उसे चैलेंज किया गया था। इसी से जुड़ी पिटीशन संख्या 6712/2021 थी, जो 14 जुलाई 2022 को सुनी गई। पिटीशन के मुताबिक, पहले का ट्रासंफर ऑर्डर 13 जुलाई 2021 का है। उसमें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल 'एएसजी' ने सरकार की ओर से वादा किया था कि वह ट्रांसफर ऑर्डर विड्रा कर लेंगे। हालांकि 19 जुलाई 2021 को हाईकोर्ट ने उस ऑर्डर को स्टे कर दिया। पिटीशनर की ओर से कहा गया कि इस केस को अब निर्णय पर पहुंचाया जाए। 

प्राथमिकता के आधार नोएडा तबादला 
इसके बाद भी यौन शोषण केस की जांच को प्रभावित या उसमें देरी करने का प्रयास हुआ। एएसजी के वादे के बाद भी 30 जून 2022 को नीरजबाला का तबादला बंगलुरु कर दिया गया। केस की दो पार्टी, जिसमें तत्कालीन गृह सचिव एवं सीआरपीएफ डीजी शामिल थे, इन्होंने भरोसा दिलाया कि नीरजबाला का दिल्ली एनसीआर में प्राथमिकता के आधार नोएडा तबादला किया जाएगा। चूंकि वे नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन हैं और एक अहम केस की जांच कर रही हैं, इसलिए नोएडा जाने के बाद भी वे अपना जांच कार्य बिना किसी बाधा के जारी रख सकती हैं। 

सील बंद लिफाफे में थी असल कहानी 
पिटीशन के पेज नंबर छह और पैरा नंबर सात में लिखा था, ट्रांसफर तो यौन शोषण मामले की जांच को कमजोर करने का एक बहाना है। इस बाबत सीआरपीएफ ने अपने काउंटर एफीडेवट में कहा, नोएडा में तबादले से इनकी मौजूदा सीट यानी नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन का कार्य बाधित नहीं होगा। नीरजबाला की पेटिशन बताती है कि इस केस की जांच को रोकने या बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे, उसे खत्म करने का भरसक प्रयास हुआ है। इसके बावजूद वे देश के सबसे बड़े यौन शोषण मामले की पीड़ित महिला जवानों को न्याय दिलाने के रास्ते पर बढ़ती रहीं। स्टेंडिंग ऑर्डर के बाद भी 13 जुलाई 2021 को जांच अधिकारी का नोएडा तबादला कर दिया गया। एएसजी ने उसे वापस नहीं लिया। कोर्ट ने उस पर स्टे दे दिया। उसके बाद नीरजबाजा को बंगलुरु जाने का ट्रांसफर ऑर्डर थमा दिया गया। 7/2014 के स्टेंडिंग ऑर्डर में लिखा था, पति पत्नी को एक जगह पर पोस्टिंग करने का प्रयास किया जाए। नीरजबाला के पति भी सीआरपीएफ में हैं। मौजूदा पिटीशन में पेज आठ और पैरा 12 के अनुसार, पिटीशनर ने कहा है कि ये तबादला आदेश दुर्भावना से जारी किया गया है। इसमें तो सजा देने का मकसद नजर आता है। 19 महिला जवानों का यौन शोषण कैसे, कब और कहां हुआ, इसका विस्तृत विवरण 15 जनवरी 2022 को एक शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को दिए गए सील बंद लिफाफे में अंकित है। 

डीआईजी ताकतवर है तभी तो उसका तबादला नहीं हुआ 
पिटीशन में लिखा था, विभाग तो यौन शोषण के आरोपी खजान सिंह को आईजी बनाने के लिए बेताब था। ये केस नहीं होता है तो वे मार्च में ही आईजी बन जाते। हालांकि सील बंद कवर में उन्हें आईजी पदोन्नत करने के आदेश हुए थे। दूसरी तरफ नीरजबाला को इसलिए बंगलुरु भेजा गया है कि ताकि पीड़ित लड़कियां अपना केस विड्रा कर लें। नीरजबाला, उनके लिए शक्ति स्तंभ बन नैतिक बल का काम कर रही थी। आरोपी डीआईजी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका कहीं तबादला तक नहीं किया गया। 

व्यापक स्तर पर यौन शोषण का माहौल 
इसका मतलब उनके संबंध दूर तक हैं। 15 जनवरी 2022 को जो अतिरिक्त शपथ पत्र दिया गया है, उसके पैरा बीस में पीड़ित महिला जवानों की डिटेल है। अतिरिक्त शपथ पत्र में लिखा था, सीआरपीएफ में व्यापक स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। बड़े अफसरों को खुश करने के लिए महिला जवानों को कथित तौर पर लुभाया जाता है। ये केवल यौनाचार का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का केस भी है। खजान सिंह को इसका जिम्मेदार बताया गया। पैरा 15 में 19 जुलाई के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था, 13 जुलाई 2021 के तबादला आदेश का मतलब, इस केस की जांच को प्रभावित करना था। उसमें हस्तक्षेप का मकसद दिख रहा था, इसलिए उस पर स्टे दिया गया था।

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