सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण की उस योजना को मंजूरी दे दी जिसके तहत राजधानी में 18 स्थानों पर पुनर्वनीकरण के लिए जमीन दी जाएगी। अदालत ने कहा कि यह कदम दिल्ली की गंभीर प्रदूषण समस्या से निपटने में मददगार साबित होगा, खासकर सर्दियों में।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत, उज्जल भुइयां और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि डीडीए लगभग 46 करोड़ रुपये दिल्ली के वन विभाग को दे, ताकि इन भूमि खंडों पर 1.67 लाख पेड़ लगाए जा सकें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों की भूमि उपयोग में कोई बदलाव नहीं होगा और इन्हें केवल वन उद्देश्यों के लिए ही प्रयोग किया जाएगा।
अब कोर्ट ने कहा कि सभी 18 स्थानों पर परिसीमा दीवार बनाई जाए ताकि लगाए गए पेड़ों की सुरक्षा और रखरखाव सुनिश्चित हो सके। साथ ही, तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति को इस पुनर्वनीकरण कार्य की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है। इस समिति में ईश्वर सिंह, सुनील लिमये और प्रदीप कृष्णन को शामिल किया गया है।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि 46 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की आवश्यकता हुई, तो डी.डी.ए. से अतिरिक्त फंड प्राप्त किया जा सकता है।
गौरतलब है कि मई में सर्वोच्च न्यायालय ने रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के आदेशों की अवहेलना करने पर डीडीए अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया था। अदालत ने तब डीडीए को निर्देश दिया था कि वह राजधानी में 185 एकड़ जमीन पर वृक्षारोपण करे। तब अदालत ने यह माना था कि डीडीए अधिकारियों का कदम अदालत के आदेशों के विपरीत था, लेकिन उनका उद्देश्य अर्धसैनिक बलों के अस्पताल के लिए मार्ग चौड़ा करना था, इसलिए इसे दुर्भावनापूर्ण नहीं माना गया। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में किसी विकास परियोजना को जनहित के नाम पर निजी लाभ के लिए किया गया पाया गया, तो ऐसे मामले में कार्रवाई की जाएगी।
क्या है दिल्ली रिज क्षेत्र?
बता दें कि दिल्ली का रिज क्षेत्र अरावली पहाड़ी श्रृंखला का बाहरी हिस्सा है। यह क्षेत्र चट्टानों, पहाड़ों और वनों से आच्छादित है। इसे चार क्षेत्रों (दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर) में बांटा गया है। ये चारों क्षेत्र करीब 7,785 हेक्टेयर में फैले हैं।