कोरोना वायरस का संक्रमण देश के कई राज्यों में तेजी से फैल रहा है। वायरस की चपेट में आकर तमिलनाडु में 28 मई तक 48 घंटों में 50 फीसद कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई है। शनिवार के दिन तमिलनाडु में 12 मौतें हुईं जो कि एक दिन का सर्वाधिक आंकड़ा है।
तमिलनाडु में कोरोना वायरस की वजह से एक मरीज ने अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही अपना तोड़ दिया और पिछले 24 घंटों के समय में ही कुल चार मरीज भी कोविड-19 की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे हैं।
मरने वालों की संख्या में मध्यम वर्षीय समूह के मरीज ज्यादा हैं। इन मरीजों की अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद ही मौत हो जा रही है, जिसका अर्थ यह हो सकता है कि राज्य में कोरोना के मामलों की निगरानी में देरी हो रही है।
संक्रमण बीमारियों के जानकार डॉ सुब्रमण्यम स्वामीनाथन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के 24 घंटे के भीतर ही मरीज की मृत्यु हो जा रही है। इस बात की संभावना है कि डॉक्टर के कोरोना टेस्ट करने से पहले ही उनकी मौत हो जाए।
तेलंगाना में 18 मई से लेकर 28 मई तक कोरोना से मरने वाले मरीजों की संख्या तेज इजाफा हुआ। इन दस दिनों में राज्य में कोरोना से 35 लोगों की मौत हो गई। कोरोना से मौत का यह आंकड़ा डॉक्टर के लिए भयानक अनुभव रहा। 10 दिन में 35 लोगों की मौत का आंकड़ा राज्य में कुल मरने वालों की संख्या का आधे से भी ज्यादा है।
कुछ जानकारों का मानना है कि टेस्टिंग में देरी और कमी होने से कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है और यही कारण है कि कोरोना से मरने वालों की संख्या में भी तेजी हो रही है।
एम्स के महानिदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि अस्पताल में कोरोना के मामले इसलिए देरी से आ रहे हैं क्योंकि कोविड-19 होने का कलंक या डर मरीज और उसके परिवार को एक हद तक डरा देता है कि वो अस्पताल जाने से कतराते हैं और इसकी वजह से ही मृत्युदर बढ़ सकती है।