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बीमा बिल: नियंत्रण होगा विदेशी, प्रबंधन रहेगा स्वदेशी

Fri, 19 Mar 2021 01:41 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • बीमा कंपनियों में भारतीयों को ही देने होंगे निदेशक मंडल से लेकर अहम प्रबंधकीय पदों पर नियुक्ति।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
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विस्तार
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बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 74 फीसदी करने की आखिरी अड़चन भी दूर होने के बावजूद कंपनियां भारतीय नागरिकों के हितों के लिए ही बाध्य बनी रहेंगी। इसका कारण है एफडीआई बढ़ाने के लिए बृहस्पतिवार को राज्यसभा में पारित बीमा बिल के कुछ अहम प्रावधान, जिनमें कंपनियों का नियंत्रण विदेशी हाथों में जाने के बावजूद अहम पदों पर भारतीयों को ही नियुक्त करना अनिवार्य बनाया गया है।

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साथ ही निदेशक मंडल में कम से कम 50 फीसदी स्वतंत्र निदेशकों का होना भी आवश्यक बनाया गया है। बीमा (संशोधन) विधेयक, 2021 पर हुई बहस का जवाब देते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बिल से बीमा कंपनियों में 74 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी कंपनियाें को मिलेगी, लेकिन निदेशक मंडल से लेकर अहम प्रबंधकीय पदों तक पर भारतीय नागरिकों को ही नियुक्ति दी जाएगी।

ये नागरिक भारतीय कानून के दायरे में आएंगे। ऐसे में विदेशी कंपनियां इस देश में होने वाली हर संचालन गतिविधि को नियंत्रित कर सकती हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि कोई भी पैसा बाहर ले जा सकता है और हम बैठकर देखते रहेंगे। विदेशी कंपनियों को मुनाफे की एक निश्चित सीमा को सामान्य रिजर्व के तौर पर देश में ही निवेश करना होगा। वे इसे बाहर नहीं ले जा सकती हैं। वित्त मंत्री ने कहा, बिल में जुड़ी इन शर्तों से यह संदेह दूर हो जाना चाहिए कि ज्यादा एफडीआई उपनिवेशवाद को बढ़ावा देगी। 
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वित्त मंत्री ने बीमा बिल को साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह की जोड़ी द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का ही एक हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, बीमा क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और उसे पूंजी की जरूरत है। बीमा कंपनियां नकदी तरलता के दबाव का सामना कर रही हैं और ऊंची निवेश सीमा से उन्हें आवश्यक धन जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बिल को बीमा नियामक इरडा के साथ व्यापक विमर्श के बाद पेश किया गया है।

कांग्रेस समेत विपक्ष ने किया वॉकआउट
राज्यसभा में बीमा बिल के ध्वनिमत से पारित होने के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया। इससे पहले भी उन्होंने बिल पर चर्चा शुरू होने के बाद इसे परीक्षण के लिए राज्यसभा की सलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके चलते चार बार कार्यवाही रोकनी पड़ी। राज्यसभा में पारित होने के बाद अब बीमा बिल को मंजूरी के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा। 

पिछले छह साल में...
2015 में एफडीआई सीमा 24 से बढ़ाकर की गई थी 49 फीसदी।
2015 से बीमा क्षेत्र को 26 हजार करोड़ रुपये की एफडीआई मिली है।

निजी क्षेत्र के बीमा कर्मचारी भी भारतीय
वित्त मंत्री ने रोजगार से जुड़ी चिंताओं का जवाब देते हुए कहा कि बीमा क्षेत्र की सभी श्रेणियों में छह सरकारी कंपनियां हैं तो 50 निजी कंपनियां हैं। सरकारी कंपनियों में 1.65 लाख लोग काम कर रहे हैं तो निजी क्षेत्र में 2.67 लाख कर्मचारी हैं और वे सब भी हमारे ही लोग हैं। हम उनके लिए उतना ही चिंतित हैं, जितना सरकारी कर्मचारियों के लिए। वे भी अपने जीवनयापन के लिए काम कर रहे हैं तो हम उन्हें नहीं भूल सकते।

एफडीआई बढ़ाने का लक्ष्य

  • देश में बीमा उपयोग को वैश्विक स्तर तक बढ़ाना है।
  • अभी जीडीपी का 3.6 फीसदी है जीवन बीमा प्रीमियम।
  • यह 7.16 फीसदी के वैश्विक औसत से है बेहद कम।
  • सामान्य बीमा है जीडीपी का महज 0.94 फीसदी।
  • सामान्य बीमा का वैश्विक औसत है 2.88 फीसदी।
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