गुजरात में खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन (एफडीसीए) ने 24,363 गर्भपात किट जब्त की। इनकी कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपये है। इसके अलावा मादक और नशीली पदार्थ भी बरामद किया गया। इन सामानों को गैर कानूनी तरीके से बेचने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
एफडीसीए आयुक्त हेमंत कोशिया ने बताया कि इन लोगों को अहमदाबाद और सूरत में विभिन्न जगहों से पकड़ा गया। सभी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है जबकि एक व्यक्ति को गुजरात पुलिस ने मादक पदार्थ मिलने के बाद एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय गर्भपात अधिनियम के तहत गर्भपात किट स्त्री रोग विशेषज्ञ की अनुशंसा पर ही बेची जा सकती है।
एफडीसीए ने बताया कि आरोपियों में से एक अहमदाबाद निवासी पिंटू शाह गर्भपात किट, एक अन्य आरोपी व बनासकांठा के दीसा में वितरक विनोद माहेश्वरी और लोकेश माहेश्वरी से गैर कानूनी तरीके से खरीदता था और उन्हें बिना डॉक्टर की पर्ची के ऑनलाइन बेचता था। शाह ने गत डेढ़ साल में करीब 800 ऐसे किट की बिक्री ऑनलाइन की है।
दीसा के रहने वाले माहेश्वरी को ये किट फर्जी चिकित्सा पर्ची के आधार पर सूरत के जावेरी सांगला से मिलते थे। सांगला को भी ये किट आरोपी राजेश यादव से मिलते थे जो मुंबई की विपणन कंपनी में सेल्स मैनेजर है। एफडीसीए के मुताबिक अन्य आरोपी की पहचान नीलय वोरा के तौर पर की गई है जो मुंबई में विपणन प्रतिनिधि है। वहीं अन्य आरोपी विपुल पटेल और मोनीश पंचाल है जिनके पास से ऐसे 700 किट मिले हैं।
एक अन्य आरोपी तुषार ठक्कर के पास से मादक पदार्थ मिले हैं जिसे पुलिस को सौंप दिया गया है। उसे एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी ने बताया कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के तीन लाख वायल और बिना लेबल के अन्य इंजेक्शन भी ठक्कर के पास से बरामद किए गए।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों को जांच के लिए वडोडरा स्थित एफडीसीए लैबोरेटरी भेजे गए हैं। उसके पास से अल्प्राकैन 0.5 टैबलेट (अल्प्राजोलम युक्त), एडिटैक्स एन-2 टैबलेट (ब्यूप्रेनोर्फिन और नालोक्सोन युक्त) और एसपीएएस-ट्रैंकन टैबलेट (ट्रामाडोल युक्त) भी जब्त की। ये भी बिना लाइसेंस के बेची जा रही थी। ये ड्रग ठक्कर को राजस्थान से मिली थी। एफडीसीए इस एंगल से मामले की जांच कर रही है।