कांग्रेस और भाजपा ने विदेशी कंपनियों से चंदा लेने से संबंधित मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली हैं।
दोनों दलों के वकीलों ने न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि विदेशी चंदा विनियमन कानून (एफसीआरए) में संशोधन किया गया है और इसके तहत उन पर कानून का उल्लंघन करने का मामला नहीं बनता। लिहाजा अब वह इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
भाजपा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान और कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि वे अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें याचिकाएं वापस लेने की इजाजत दे दी।
वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि वर्ष 2010 में संशोधन के तहत राजनीतिक दल को मिले चंदे को विदेशी योगदान नहीं करार दिया जा सकता बशर्ते की उस कंपनी में भारतीय कंपनी का हिस्सा 50 फीसदी से अधिक हो।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च, 2014 में अपने फैसले में कांग्रेस और भाजपा द्वारा यूके की कंपनी वेदांता रिसोर्सेज की सहायक कंपनियों से लिए गए चंदे को एफसीआरए के खिलाफ बताया था। हाईकोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को इन दोनों दलों के खिलाफ छह महीने के भीतर कार्रवाई करने के लिए कहा था। इस फैसले को कांग्रेस और भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।