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मतभेद बरकरार: एफसीआरए संशोधन विधेयक पर सियासी टकराव, सरकार ने आरोपों को नकारा

Wed, 14 Oct 2026 03:59 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

एफसीआरए विधेयक को लेकर लंबे समय से सहमति बनाने की कोशिश चल रही है, लेकिन अभी तक मतभेद पूरी तरह से सुलझ नहीं पाए हैं। हालांकि सरकार सियासी टकराव की बात से इनकार कर रही है। 
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संसद भवन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बरकरार हैं। विपक्षी दलों को आशंका है कि विधेयक के कुछ प्रावधान अल्पसंख्यक समुदायों की ओर से संचालित सामाजिक कल्याण और शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली वैध विदेशी सहायता को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि विधेयक का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विदेशी अंशदान के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
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विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि प्रस्तावित कानून के कई प्रमुख प्रावधान 2010 में यूपीए सरकार के बनाए एफसीआरए कानून में भी मौजूद थे।

विपक्ष को वैध विदेशी सहायता प्रभावित होने की आशंका
विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की है कि इनके कारण ईसाई एनजीओ और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थानों के लिए विदेश से वैध धन प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे प्रावधानों के प्रभाव और उनके इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
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