साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी में नरेंद्र मोदी-अरविंद केजरीवाल की चुनावी लड़ाई पर कमल स्वरूप द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन को फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल (एफसीएटी) ने मंजूरी नहीं दी है।
ट्रिब्यूनल का मानना है कि इस डॉक्यूमेंट्री से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। सेंसर बोर्ड द्वारा ‘बैट्ल ऑफ बनारस’ को प्रमाणित करने से इनकार करने पर निर्माता ने ट्रिब्यूनल का रुख किया था।
अब वे हाईकोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं। एफसीएटी ने अपने निर्णय में कहा, ‘फिल्म को देखने और पक्षों को सुनने के बाद हमारा नजरिया है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का प्रदर्शन के लिए प्रमाणपत्र देने से इनकार करना तर्कसंगत है।
इसका कारण है कि फिल्म की थीम राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के नफरत और भड़काउ संवादों से भरे हैं। और यह लोगों को जाति और सांप्रदायिक आधार पर बांटने का प्रयास करता है। यह फिल्म स्पष्ट रूप से सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणन के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है...इस आधार पर अपील खारिज की जाती है।’