केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेषज्ञों के एक केंद्रीय पैनल का पुनर्गठन किया है। यह पैनल उन उन लोगों के लिए मुआवजे की राशि तय करेगा, जिनका यूके की डेप्यू इंटरनेशनल लिमिटेड (अब भारत में जॉनसन एंड जॉनसन प्राइवेट लिमिटेड) ने दोषपूर्ण हिप प्रत्यारोपण किया था।
भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर पैनल के पुनर्गठन की जानकारी दी। नोटिस के अनुसार, पैनल का नेतृत्व दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार शुक्ला करेंगे। यह पैनल दोषपूर्ण हिप प्रत्यारोपण से प्रभावित मरीजों के लिए मुआवजा और चिकित्सा देखभाल की राशि तय करेगा।
2010 में कंपनी ने हिप प्रत्यारोपणों को वापस मंगवाने का फैसला किया
नोटिस के अनुसार, एएसआर हिप इम्प्लांट का निर्माण मेसर्स डेप्यू इंटरनेशनल लिमिटेड, यूके द्वारा किया गया था। मेसर्स डेप्यू मेडिकल प्राइवेट, मुंबई- अब जॉनसन एंड जॉनसन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयात किए गए थे। 2010 में, कंपनी ने दुनियाभर में इन हिप प्रत्यारोपणों को वापस मंगवाने का निर्णय लिया था, क्योंकि इनसे जुड़ी कई शिकायतें आई थीं।
अपनी सुविधानुसार केंद्र और राज्य स्तरीय समिति से संपर्क करें प्रभावित
जो लोग इन दोषपूर्ण प्रत्यारोपणों से प्रभावित हैं और जिनको विकलांगता या अन्य नुकसान हुआ है। वे अपनी सुविधा के अनुसार केंद्रीय विशेषज्ञ समिति या राज्य स्तरीय समिति से संपर्क कर सकते हैं। नोटिस के कहा गया है, 'यदि प्रभावित मरीज केंद्रीय विशेषज्ञ समिति से संपर्क करने का इरादा रखते हैं, तो वे कानूनी सेल, सीडीएससीओ (मुख्यालय), एफडीए भवन, कोटला रोड, नई दिल्ली -110002 को एक ई-मेल लिख सकते हैं या डाक से/हाथ से एक हार्ड कॉपी भेज सकते हैं। ईमेल आईडी-legalcell@cdsco.nic.in है।'
नोटिस में कहा गया है कि यदि प्रभावित मरीज राज्य-स्तरीय समिति से संपर्क करने का इरादा रखते हैं, तो वे संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के औषधि नियंत्रक को लिख सकते हैं, जो राज्य-स्तरीय पैनल के सदस्य-सचिव होंगे।
पहले दावा आवेदन जमा करने वालों को नया दावा करने की आवश्यकता नहीं
नोटिस के अनुसार, जिन एएसआर रोगियों ने पहले ही राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय समिति या केंद्रीय विशेषज्ञ समिति के समक्ष अपना दावा आवेदन जमा कर दिया है, उन्हें कोई नया दावा आवेदन दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है।