तीन तलाक और हलाला के खिलाफ मुहिम चला रहीं आला हजरत खानदान की बहू और आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान के खिलाफ कई दिनों की कशमकश के बाद आखिरकार सोमवार को दरगाह आला हजरत के मरकजी दारुल इफ्ता से फतवा जारी कर दिया गया। इस फतवे में उन पर शरीयत के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप तय करते हुए उनका मुस्लिम समाज से बहिष्कार करने का एलान किया गया है। उनके साथ खाने-पीने, उठने-बैठने और मिलने-जुलने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
यह फतवा जांनशीन ताजुश्शरीया एवं शहर काजी मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की ओर से जारी किया गया है जिसका एलान सोमवार को दरगाह आला हजरत स्थित मरकजी तंजीम जमात अंसारुल इस्लाम के कार्यालय में जामा मस्जिद के शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने प्रेस के सामने किया। उन्होंने फतवे हुक्म सुनाते हुए कहा कि इस फतवे के तहत अगर कोई निदा खान के साथ मिलता-जुलता है, खाना-पीना करता है या उठता-बैठता है तो उस पर भी यह हुक्म लागू होगा।
शहर इमाम ने कहा कि अगर निदा खान तौबा कर लेती हैं तब उन्हें कलमा पढ़ना होगा। इसके बाद वह फिर हम लोगों में शामिल हो सकती हैं। ऐसा करने पर वह जैसे पहले हमारी बहन थीं, वैसे ही फिर हमारी बहन बनी रहेंगी। यह फतवा मुफ्ती खुर्शीद आलम के ही सवाल पर दिया गया। इसके एलान के दौरान मौलाना फैज रजा खां अजहरी, मौलाना गुलाम मोइन चिश्ती, मौलाना शाहनवाज रजवी आदि मौजूद थे।
फरहत की सुन्नियत में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
निदा खान पर फतवे के एलान के दौरान तीन तलाक और हलाला लड़ाई लड़ रही मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी के सवाल पर मुफ्ती खुर्शीद आलम ने कहा कि फरहत से कोई मतलब ही नहीं है। वह हमारे मजहब और सुन्नियत में दखलंदाजी न करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं को इकट्ठा करके शोर करना सोची-समझी साजिश है। इसी साजिश के तहत यह सब हो रहा है। सियासी लोगों ने इसे हवा दे रखी है।