कहते है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती लेकिन इसके लिए जरूरत होती है, लगन से लगातार अभ्यास करने की और इसी लगन से पिछले साल फेल होने वाले एक छात्र ने JEE की प्रवेश परीक्षा को पास कर अपने परिवार का नाम रोशन किया है। छात्र सुनील ने अपनी पढ़ाई के आड़े कभी अपनी गरीबी को नहीं आने दिया और एकसुध होकर अपने लक्ष्य की ओर ध्यान दिया। 18 वर्षीय सुनील कुमार ने ओबीसी कैटेगरी में 115 वां स्थान हासिल किया है। सुनील के पिता गर्मी में आईसक्रीम तो सर्दी में चाट और गोल-गप्पे की दुकान लगा परिवार का पेट पालते हैं। सुनील राजस्थान के एक छोटे से जिले झुनझूनू के रहने वाले हैं।
बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुनील ने ओबीसी कैटगरी में 115 वां स्थान हासिल किया है वहीं सामान्य कैटेगरी में सुनील को 881वां रैंक मिला है। सुनील ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से 366 में 266 अंक प्राप्त किए हैं। बता दें कि सुनील ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा में 91.6 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
पिता गर्मी में आइसक्रीम तो सर्दी में बेचता है चाट-गोलगप्पे
बता दें कि सुनील के पिता शंकरलाल सैनी का कोई खास कामधंधा नहीं है लेकिन परिवार का पेट पालने के लिए वे गर्मी में आइसक्रीम तो सर्दी में चाट-गोल-गप्पे की रेहड़ी लगाते हैं। ऐसे में बेटे के इतनी बड़ी परीक्षा पास करने से शंकरलाल के खुशी का ठिकाना नहीं है। ऐसे में बेटे की इस कामयाबी से पूरे घर में खुशी की लहर सी दौड़ गई है।
पिछले साल ये हो गई थी गलती
सुनील ने बताया कि पिछले साल JEE Mains में पास होने के बाद JEE Advanced में पास नहीं हो पाया और ना ही इसके बारे में उसे कोई अच्छी जानकारी थी। खबर है कि सुनील का सुपर-30 कार्यक्रम के तहत रेजिडेंसियल कोंचिग के लिए चयन हुआ था जो ऑयल इंडिया लिमिटेड की वित्तिय मदद से चलाया जाता है जो कि सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व केंद्र (CSRL) द्वारा लागू किया गया है।
सुनील की जुबानी
"मैंने पिछले साल 1 जुलाई को कोचिंग ज्वॉइन किया था और मैनेजर देवेंद्र शर्मा के साथ-साथ राम प्रकाश सर ने मुझे मेरे लक्ष्य को हासिल करवाने में काफी सहायता की। मुझे इस साल परीक्षा को लेकर सटीक जानकारी हो गई थी। फिर मैंने पापा को बताया वो बहुत खुश हुए। वहीं, सुनील का कहना है कि वह कानपूर या खड़गपुर से पढ़ाई करना चाहता है।