राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मतलब है कि आतंकी संगठनों और आतंकी घटनाओं को वित्तपोषित करना किसी देश की राष्ट्रीय नीति हो। भारत, पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता आया है।
वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था FATF (Financial Action Task Force) ने पहली बार राज्य प्रायोजित आतंकवाद की बात को स्वीकार किया है और अपनी ताजा रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। एफएटीएफ का कहना है कि राज्य प्रायोजित आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। गौरतलब है कि भारत लंबे अर्से से राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा वैश्विक मंच पर उठाता रहा है और इसके खिलाफ कार्रवाई का आह्वान करता रहा है। अब एफएटीएफ द्वारा भी राज्य प्रयोजित आतंकवाद को बड़ा खतरा मानना भारत की बड़ी जीत है। वहीं इससे पाकिस्तान की परेशानी बढ़नी तय है।
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आतंकी संगठनों के फंडिंग पैटर्न का भी रिपोर्ट में जिक्र
राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मतलब है कि आतंकी संगठनों और आतंकी घटनाओं को वित्तपोषित करना किसी देश की राष्ट्रीय नीति हो। भारत, पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता आया है। अब एफएटीएफ ने अपनी जुलाई 2025 की 'कॉम्प्रिहेंसिव अपडेट ऑन टेरेरिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क' रिपोर्ट में पहली बार राज्य प्रायोजित आतंकवाद की बात स्वीकार की है। एफएटीएफ की रिपोर्ट में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के फंडिंग पैटर्न का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा भारत में हमले के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से सामान खरीदा गया।
सरकारों को दी गई चेतावनी
एफएटीएफ ने पुलवामा आतंकी हमले का भी जिक्र किया और बताया कि पुलवामा हमले के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट से विस्फोटक खऱीदा गया। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि साल 2022 में यूपी के गोरखनाथ मंदिर पर हुए हमले में हमलावर को ऑनलाइन मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म PayPal के जरिए भुगतान किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से देशों में आतंकवाद की फंडिंग को समझने और रोकने की क्षमता में अब भी बड़ी कमियां हैं, और अगर इन्हें समय पर ठीक नहीं किया गया तो आतंकी संगठन मौजूदा कमजोरियों का फायदा उठाते रहेंगे। आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल सिस्टम का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों को जारी रखने और हमले करने के लिए करते हैं। FATF ने दुनियाभर की सरकारों और डिजिटल कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे इन प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस उपाय करें, क्योंकि ये अब आतंकी संगठनों के लिए एक नया जरिया बनते जा रहे हैं।