FATF Report: भारत की तरफ से पकड़े गए एशियाई झंडे वाले जहाज में मिले मशीनरी पर वित्तीय निगरानी संस्था एफएटीएफ की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान पता चला कि वह मशीन असल में एक ऑटोक्लेव है, जिसका इस्तेमाल मिसाइल निर्माण में होता है।
वित्तीय निगरानी संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फोर्स) की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2020 में भारत की तरफ से जब्त की गई एक ड्यूल-यूज मशीन (जिसका सैन्य और नागरिक दोनों तरह से इस्तेमाल हो सकता है) का संबंध पाकिस्तान की नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) से है। यह एजेंसी पाकिस्तान के मिसाइल विकास कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
क्या है पूरा मामला?
3 फरवरी 2020 को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर भारत के कस्टम अधिकारियों ने 'दा कुई युन' नाम के एशियाई झंडे वाले व्यापारी जहाज को रोका था। जहाज पाकिस्तान जा रहा था और उस पर लदी एक मशीन को गलत तरीके से इंडस्ट्रियल ड्रायर घोषित किया गया था। जांच के दौरान पता चला कि वह मशीन असल में एक ऑटोक्लेव है, जिसका इस्तेमाल मिसाइल निर्माण में होता है।
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एफएटीएफ रिपोर्ट में क्या कहा गया?
एफएटीएफ की रिपोर्ट में कहा गया, जब्त की गई वस्तु मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) की ड्यूल-यूज एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में शामिल है। शिपिंग दस्तावेजों से यह साफ हुआ कि मशीन का ऑर्डर पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) ने दिया था। बिना उचित अनुमति के ऐसी वस्तुओं का निर्यात अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
क्या है एनडीसी?
नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (एनडीसी) पाकिस्तान की एक सरकारी रक्षा एजेंसी है, जो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और अन्य सैन्य तकनीकें विकसित करती है। एफएटीएफ की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दुनियाभर में सिर्फ 16% देश ऐसे हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हथियार प्रसार विरोधी नियमों को प्रभावी रूप से लागू किया है। वैश्विक समुद्री और शिपिंग सेक्टर को ड्यूल-यूज वस्तुओं की अवैध तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। गैरकानूनी नेटवर्क अब ज्यादा आधुनिक और छुपे हुए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि वे प्रतिबंधों से बच सकें।
भारत के लिए क्या मायने हैं?
इस रिपोर्ट से साफ होता है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खतरे को समय रहते रोका। यह मामला वैश्विक निगरानी एजेंसियों के लिए एक चेतावनी भी है कि कैसे कुछ देश गुप्त रूप से हथियारों के लिए संवेदनशील सामान इकट्ठा कर रहे हैं।