पाकिस्तान को काली सूची में डालने के मुद्दे पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के 39 सदस्य देश और क्षेत्रीय समूह दो गुट में बंट गए हैं। एक तरफ चीन, मलेशिया और तुर्की जैसे देश अपने सहयोगियों के साथ पाकिस्तान को बचाने की कवायद में जुट गए हैं। दूसरी तरफ, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देश पाक के खिलाफ कार्रवाई कर उसे कड़ा संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।
इस मामले से जुड़े सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि पाकिस्तान को एफएटीएफ ने 18 जून को ही ग्रे सूची में डालकर आतंकियों की फंडिंग व उन पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त वक्त दिया गया था। लेकिन बृहस्पतिवार-शुक्रवार को हुई एफएटीएफ की बैठक में सदस्य देशों के बीच गुटबंदी हो जाने के चलते इस वैश्विक निगरानी संस्था को क बार फिर पाकिस्तान को आतंकी तंत्र पर कार्रवाई के लिए चार महीने की मोहलत देनी पड़ी।
एफएटीएफ में इस बार भी पाकिस्तान को समय मिल जाने के बावजूद भारत को भरोसा है कि पड़ोसी देश किसी भी सूरत में ज्यादा समय तक अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भाग पाएगा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद शनिवार को सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने भी कहा कि पाकिस्तान को अपने आतंकी तंत्र के खिलाफ कार्रवाई करनी ही होगी।